नई दिल्ली, (आरएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों और उनसे संबंधित विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए निर्वाचन आयोग, केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण तथा मतदाताओं के नाम हटाए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर निर्वाचन आयोग और सरकार को नोटिस जारी किया। वहीं, जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा गया है।सुनवाई के दौरान अदालत ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं को भी नोटिस जारी किया। यह याचिका मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं के विरोध में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने से संबंधित है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने राहुल गांधी के आचरण पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें इस संबंध में स्पष्टीकरण देना होगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कोई भी सुप्रीम कोर्ट को डराने या धमकाने की कोशिश नहीं कर सकता।राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने 12 अक्टूबर को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया था। इस घटनाक्रम को लेकर अदालत में कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई और प्रशासनिक प्रतिबंधों को चुनौती दी गई है।सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया। याचिका के अनुसार, 12 अक्टूबर को जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया था। इसके स्थान पर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान को प्रदर्शन स्थलों के रूप में निर्धारित किया गया।
अदालत ने विरोध प्रदर्शन से जुड़े सभी सीसीटीवी दृश्य और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि कानून लागू करने वाली सभी एजेंसियां, जिनमें पुलिस और प्रशासन शामिल हैं, अपने पास उपलब्ध सीसीटीवी दृश्यों तथा अन्य डिजिटल सामग्री को सुरक्षित रखें। उन्होंने यह भी कहा कि निजी पक्षों को भी संबंधित सामग्री प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता होगी।
यह निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं और पुलिस की कार्रवाई को लेकर विभिन्न पक्षों की ओर से सवाल उठाए गए हैं। सुरक्षित रखे गए दृश्य और डिजिटल साक्ष्य मामले की जांच तथा सुनवाई में उपयोगी हो सकते हैं।
सुनवाई के दौरान विरोध प्रदर्शन के समय महिला पत्रकारों पर कथित हमले का मुद्दा भी उठाया गया। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि तकनीक के मौजूदा दौर में मोबाइल फोन रखने वाला कोई भी व्यक्ति पत्रकार होने का दावा कर सकता है। उन्होंने कहा कि कई लोग हाथ में सूक्ष्म ध्वनि रिकॉर्ड करने वाले उपकरण लेकर घूमते हैं, रिकॉर्डिंग करने का दावा करते हैं और बाद में वीडियो को लघु दृश्य के रूप में इंटरनेट पर साझा कर देते हैं। ऐसे में स्वतंत्र पत्रकार और केवल वीडियो बनाने वाले व्यक्ति के बीच अंतर करना मुश्किल हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाएं मुख्य रूप से दो मुद्दों से संबंधित हैं—मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण और दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के दौरान की गई कार्रवाई। विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित याचिकाओं में इस प्रक्रिया को रद्द करने तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति से जुड़े वर्ष 2023 के कानून को चुनौती दी गई है।
वहीं, दिल्ली में हुए प्रदर्शनों से संबंधित याचिकाओं में मेट्रो और रेल सेवाओं तथा इंटरनेट पर लगाए गए प्रतिबंधों और अदालत के आदेशों की कथित अवहेलना को लेकर आपत्तियां उठाई गई हैं। इन मामलों में अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अब आगे की सुनवाई में विभिन्न पक्षों के जवाब और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर मामले की दिशा स्पष्ट होगी।
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