नई दिल्ली ,12 अक्टूबर ,(आरएनएस)। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को प्रदर्शन वापस लेने की सलाह दी है। आठवले ने कहा कि सीजेपी का मूल उद्देश्य छात्रों के हितों की रक्षा करना था, इसलिए उन्हें चुनाव आयोग के मामलों में पडऩे के बजाय छात्रों की शिक्षा प्रणाली और परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर ही आवाज उठानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा बुलाए गए विरोध प्रदर्शनों पर भी सवाल खड़े करते हुए विपक्ष पर देश में अराजकता फैलाने का आरोप लगाया।
नीट मुद्दे पर बनी थी पार्टी, सारी मांगें पूरी हुईं तो अब सीईसी के पीछे क्यों?’
रविवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि सीजेपी को इस तरह का राजनीतिक आंदोलन खड़ा करने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने पार्टी के गठन की पृष्ठभूमि याद दिलाते हुए कहा, कॉकरोच जनता पार्टी की स्थापना नीट परीक्षा के पेपर लीक मामले के खिलाफ आवाज उठाने के लिए हुई थी। उस समय पार्टी ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा था, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वीकार कर लिया और आपकी सभी प्रमुख मांगें पूरी की गईं। अब ऐसी स्थिति में ज्ञानेश कुमार के मामले में हस्तक्षेप करने की आपको क्या जरूरत है?
छात्रों की शिक्षा नीति और परीक्षा सुधारों पर आंदोलन करने का सुझाव
केंद्रीय मंत्री ने सीजेपी नेतृत्व को नसीहत देते हुए कहा कि अगर आंदोलन करना ही है, तो उसका केंद्र बिंदु छात्र होने चाहिए। उन्होंने कहा, “छात्रों को कैसी बेहतर शिक्षा नीति मिलनी चाहिए, पारदर्शी परीक्षाएं कैसे आयोजित हों और मौजूदा कमियों के क्या कारण हैं, इन रचनात्मक विषयों पर आंदोलन खड़ा कीजिए। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे को मुद्दा बनाकर प्रदर्शन करने का कोई औचित्य नहीं है।”आठवले ने राहुल गांधी और विपक्षी दलों पर भी हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वे लोकतांत्रिक संस्थाओं को निशाना बनाकर माहौल बिगाडऩे का प्रयास कर रहे हैं।
13 करोड़ वोटों के विलोपन पर ष्टश्वष्ट का बचाव, आठवले ने दिया आंकड़ों का हवाला
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का बचाव करते हुए आठवले ने मतदाता सूची से हटाए गए 13 करोड़ नामों को लेकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा की गई यह कार्रवाई पूरी तरह नियमों के अनुरूप है।
आठवले के अनुसार, हटाए गए 13 करोड़ नामों में से लगभग 6 करोड़ मतदाता ऐसे हैं जिनका दूसरी जगहों पर स्थानांतरण हो चुका है, यानी वे रोजगार या व्यापार के सिलसिले में अन्य राज्यों अथवा शहरों में बस गए हैं। वहीं, करीब 1 करोड़ मतदाता ऐसे पाए गए जिनके नाम दो अलग-अलग जगहों की मतदाता सूचियों में दर्ज थे, जिनमें से एक नाम हटाया गया है। इसके अलावा लगभग 3 करोड़ ऐसे लोग हैं जो अपने पते पर मौजूद नहीं हैं या लापता हैं।” उन्होंने कहा कि आयोग ने मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए यह आवश्यक प्रक्रिया अपनाई है।








