ओस्लो (ए.)। दक्षिण अफ्रीका की प्रख्यात न्यायविद और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार विशेषज्ञ नवनेथम ‘नवी’ पिल्लई को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित करने का ऐलान किया गया है। नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने शुक्रवार को इसकी आधिकारिक घोषणा की। उन्हें दुनिया भर में शांति, इंसानी गरिमा और अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत करने के अथक प्रयासों के लिए इस सर्वोच्च वैश्विक सम्मान से नवाजा गया है। भारतीय मूल के एक साधारण तमिल परिवार से निकलकर वैश्विक न्याय व्यवस्था के शीर्ष तक पहुंचने वाली नवी पिल्लई का जीवन रंगभेद, अन्याय और दमन के खिलाफ एक ऐतिहासिक संघर्ष की दास्तान है नवी पिल्लई की जड़ें सीधे तौर पर भारत से जुड़ी हुई हैं। उनके पिता नारायणसामी नायडू और माता संथामा नायडू मूल रूप से भारत के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु से ताल्लुक रखते थे। 1890 के दशक में अंग्रेजों के दौर में उनके दादा-दादी को गन्ने के खेतों में मजदूरी करने के लिए भारत से दक्षिण अफ्रीका ले जाया गया था।
नवी पिल्लई के पिता ने अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए बस ड्राइवर से लेकर मछली पकडऩे तक के कठिन काम किए। 23 सितंबर 1941 को दक्षिण अफ्रीका के डरबन में जन्मीं पिल्लई ने घोर अभावों और नस्लीय भेदभाव के बीच अपनी पढ़ाई पूरी की।








