दवा कंपनियां डॉक्टरों को नहीं दे पाएंगी महंगे तोहफे और विदेश यात्राओं के ऑफर, सुप्रीम कोर्ट ने दिया यह निर्देश

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नई दिल्ली, (आरएनएस)। दवा कंपनियों की ओर से डॉक्टरों को महंगे तोहफे, विदेश यात्राएं और अन्य मुफ्त सुविधाएं देकर अपनी दवाएं लिखवाने की कथित अनैतिक गतिविधियों पर अब सख्ती से रोक लगाने की तैयारी है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार को दवा कंपनियों के प्रचार और विपणन के ऐसे तौर-तरीकों पर अंकुश लगाने के उपाय सुझाने के लिए एक विशेष समिति गठित करने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि समिति का गठन सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों और टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए किया जाए। समिति दवा कंपनियों की ओर से अपनाए जाने वाले अनुचित और अनैतिक प्रचार तरीकों की समीक्षा करेगी तथा इन पर प्रभावी रोक लगाने के लिए आवश्यक उपायों की सिफारिश करेगी।फैसले का मुख्य अंश पढ़ते हुए न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने कहा कि अदालत ने भारत सरकार को एक समिति गठित करने और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों एवं टिप्पणियों के आधार पर अपनी सिफारिशें देने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश का पालन हुआ है या नहीं, इसकी समीक्षा के लिए मामले को 29 जनवरी 2027 को फिर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।यह मामला फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशंस ऑफ इंडिया (एफएमआरएआई) की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में दवा कंपनियों द्वारा अपनाए जाने वाले विपणन तरीकों को नियंत्रित करने के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। इसमें डॉक्टरों और अन्य चिकित्सा पेशेवरों को प्रभावित करने के लिए कथित तौर पर अपनाए जा रहे अनुचित तरीकों पर भी सवाल उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि डॉक्टरों को किसी विशेष दवा को लिखने के लिए प्रभावित करने के उद्देश्य से दवा कंपनियां महंगे उपहार, विदेश यात्राएं और अन्य मुफ्त सुविधाएं उपलब्ध कराती हैं। इसके अलावा दवाओं की बिक्री बढ़ाने के लिए दबाव वाले और अनुचित विपणन तरीकों का इस्तेमाल किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। याचिका में यह मांग भी की गई थी कि जब तक इस संबंध में प्रभावी कानून नहीं बनाया जाता, तब तक सुप्रीम कोर्ट ऐसे दिशा-निर्देश तय करे, जिनके माध्यम से दवा कंपनियों के अनुचित और अनैतिक तौर-तरीकों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके।इससे पहले सितंबर में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह तीन सदस्यीय समिति गठित करने की प्रक्रिया में है। समिति दवा कंपनियों की विपणन गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कानूनी ढांचा तैयार करने के संबंध में सुझाव देगी। सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश के बाद समिति को दवा कंपनियों और चिकित्सा पेशेवरों के बीच होने वाले ऐसे लेन-देन तथा प्रचार गतिविधियों पर रोक लगाने के उपाय सुझाने होंगे, जिनसे डॉक्टरों के दवा लिखने के निर्णय प्रभावित होने की आशंका रहती है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 जनवरी 2027 की तारीख तय की है। उस समय यह देखा जाएगा कि केंद्र सरकार ने समिति गठित करने और अदालत के निर्देशों के अनुरूप आगे की कार्रवाई की है या नहीं। माना जा रहा है कि समिति की सिफारिशों के आधार पर दवा कंपनियों के विपणन व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए भविष्य में अधिक प्रभावी कानूनी व्यवस्था तैयार की जा सकती है।
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