मुंबई,08 अक्टूबर। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार की शुरुआत बेहद सुस्त और उतार-चढ़ाव भरी रही। शुरुआती कारोबार में प्रमुख सूचकांक निफ्टी 22,600 के स्तर के आसपास खुला। सूचना प्रौद्योगिकी और औषधि क्षेत्र के शेयरों में खरीदारी का रुझान रहा, जबकि वित्तीय सेवाओं, दैनिक उपयोग की उपभोक्ता वस्तुओं और वाहन क्षेत्र के शेयरों में कमजोरी ने बाजार की बढ़त को सीमित कर दिया।
शुरुआती कारोबार में निफ्टी 4 अंक यानी 0.02 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 22,599.05 के स्तर पर खुला। वहीं, बंबई शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 29.30 अंक यानी 0.04 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72,668 के स्तर पर पहुंच गया।
क्षेत्रवार कारोबार की बात करें तो निफ्टी सूचना प्रौद्योगिकी, निफ्टी मिडस्मॉल हेल्थकेयर और निफ्टी फार्मा सूचकांकों में 0.59 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। इन क्षेत्रों के शेयर शुरुआती कारोबार में सबसे अधिक मांग में रहे। इसके अलावा धातु, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं और रसायन क्षेत्र के शेयरों में भी मामूली बढ़त देखी गई।
दूसरी ओर, वित्तीय सेवाओं और दैनिक उपयोग की उपभोक्ता वस्तुओं से जुड़े शेयरों में 0.38 प्रतिशत तक की गिरावट रही। इन क्षेत्रों में कमजोरी का असर व्यापक बाजार पर भी पड़ा।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक की नीतिगत रूप से कड़ी रुख वाली रणनीति के चलते आने वाले दिनों में शेयरों के मूल्यांकन पर दबाव बना रह सकता है। ब्याज दरें ऊंचे स्तर पर रहने से सावधि जमा और बांड जैसे निश्चित आय वाले निवेश विकल्प निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक हो जाते हैं।
ऐसे माहौल में निवेशक औषधि जैसे उन क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं, जिन पर ब्याज दरों में बदलाव का अपेक्षाकृत कम सीधा असर पड़ता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऊंचे मूल्यांकन के बावजूद वृद्धि आधारित शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है, जबकि कम मूल्यांकन वाले शेयरों की गति फिलहाल धीमी है।
बड़े पूंजीकरण वाले शेयरों पर दबाव का एक प्रमुख कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली भी है। इसके अलावा अमेरिकी 10 वर्षीय सरकारी बांड पर मिलने वाली आय के 5.3 प्रतिशत से ऊपर बने रहने को भी बाजार के लिए चिंता का कारण माना जा रहा है।
बुधवार को विदेशी निवेशक शुद्ध बिकवाल रहे और उन्होंने 6,121 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के शेयर बेचे। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार को सहारा दिया और करीब 4,596 करोड़ रुपये की खरीदारी की।
अमेरिकी सरकारी बांड पर बढ़ती आय और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच वैश्विक बाजारों में सतर्कता का माहौल बना हुआ है। इसका असर भारतीय निवेशकों के रुझान पर भी दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले कारोबारी सत्रों में विदेशी पूंजी का प्रवाह, वैश्विक बाजारों की दिशा, कच्चे तेल की कीमतें और ब्याज दरों से जुड़े संकेत बाजार की चाल को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे।








