असम के कट्टरपंथ मामले में एनआईए की बड़ी कार्रवाई, तीन राज्यों में 16 ठिकानों पर छापे

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गुवाहाटी/नई दिल्ली (आरएनएस)। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने असम से जुड़े एक कट्टरपंथ और सीमा पार आतंकी साजिश के मामले में मंगलवार को असम, पश्चिम बंगाल और केरल में एक साथ 16 ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान असम में 10, पश्चिम बंगाल में पांच और केरल में एक स्थान पर तलाशी ली गई। मामला बांग्लादेश के प्रतिबंधित आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) से जुड़े गुट ‘इमाम महमुदर काफिला’ (आईएमके) की कथित सीमा पार आतंकी साजिश से संबंधित है। एनआईए की यह कार्रवाई आईएमके की कथित आतंकी साजिश के मामले में 11 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए जाने के करीब तीन महीने बाद हुई है। गुवाहाटी की विशेष एनआईए अदालत में दाखिल आरोप पत्र में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
असम में एनआईए ने बारपेटा जिले के आजाद नगर और नीचूका इलाके में कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान मुस्तफिजुर रहमान और याकूब अली नाम के दो संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान कुछ दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। मामले में आगे की जांच जारी है।
एनआईए की जांच के अनुसार, आरोपी जेएमबी से जुड़े गुट आईएमके की कथित साजिश में सक्रिय रूप से शामिल थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस नेटवर्क का उद्देश्य पश्चिम बंगाल के साथ-साथ असम और त्रिपुरा सहित पूर्वोत्तर राज्यों में जेएमबी की विचारधारा का प्रसार करना था। कथित साजिश में कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देना, युवाओं को प्रभावित कर कट्टरपंथ की ओर ले जाना और भारत में संगठन के नेटवर्क का विस्तार करना शामिल था।
एनआईए के अनुसार, जेएमबी के वरिष्ठ सदस्य इमाम महमूद हबीबुल्लाह ने भारत में प्रतिबंधित संगठन के कथित एजेंडे को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से ‘इमाम महमुदर काफिला’ नामक गुट का गठन किया था। जांच एजेंसी ने दावा किया है कि आईएमके के माध्यम से भारत में संगठन की गतिविधियों को मजबूत करने की कोशिश की गई।
जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि आरोप पत्र में नामजद 11 आरोपियों ने कथित तौर पर गुप्त बैठकें आयोजित कीं, धार्मिक कट्टरपंथ से जुड़े कार्यक्रम चलाए और चरमपंथी विचारधारा से संबंधित किताबों तथा पोस्टरों का वितरण किया। इसके अलावा भारत विरोधी दुष्प्रचार के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किए जाने का भी आरोप है।
एनआईए के मुताबिक, इन गतिविधियों के माध्यम से आईएमके और जेएमबी के नेतृत्व के प्रति वफादारी बढ़ाने तथा संगठन की मौजूदगी को विस्तार देने की कोशिश की गई।
आरोप पत्र में शामिल प्रमुख आरोपियों में नसीमुद्दीन और जागिर मिया के नाम बताए गए हैं। एनआईए के अनुसार, नसीमुद्दीन असम में आईएमके की गतिविधियों की कमान संभाल रहा था, जबकि जागिर मिया पर त्रिपुरा में संगठन का नेतृत्व करने का आरोप है।
जांच के दौरान एनआईए ने कथित तौर पर आपत्तिजनक दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और विभिन्न डिजिटल अभिलेख बरामद किए हैं। एजेंसी का कहना है कि इन सामग्रियों की जांच की जा रही है और इन्हें आरोपियों के खिलाफ मामले से संबंधित साक्ष्य के तौर पर शामिल किया गया है।
तीन राज्यों में एक साथ की गई इस कार्रवाई के बाद एनआईए अब बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री की विस्तृत जांच कर रही है। एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि आईएमके और जेएमबी से जुड़े नेटवर्क का विस्तार किन क्षेत्रों तक था तथा इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
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