नई दिल्ली, (आरएनएस)। देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी शुरू होने के साथ ही बंगाल की खाड़ी के ऊपर बन रहा कम दबाव का क्षेत्र पूर्वी और मध्य भारत में बारिश का दौर जारी रख सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, 19 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं। वहीं, देश के कई अन्य हिस्सों में अभी बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारों का दौर जारी है।
मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के ऊपर बनने वाला नया मौसमी तंत्र पूर्वी और मध्य भारत में बारिश की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। इस तंत्र की शुरुआत उत्तरी थाईलैंड के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण से होने का अनुमान है। इसके 18 सितंबर के आसपास उत्तरी अंडमान सागर के ऊपर पहुंचने तथा 19 सितंबर के आसपास कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके बाद अगले तीन से चार दिनों में यह तंत्र पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए दक्षिणी ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के तट की ओर जा सकता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के ऊपर बन रहा यह तंत्र धीरे-धीरे मजबूत हो सकता है।
स्काईमेट के मौसम विशेषज्ञ महेश पलावत ने भी इसके पूर्वी तट की ओर बढऩे के साथ सक्रिय होने की संभावना जताई है। उन्होंने कहा कि इस तरह का मौसमी चक्र सामान्य तौर पर जून-जुलाई में देखने को मिलता है, लेकिन इस वर्ष सितंबर में भी ऐसा चक्रवाती परिसंचरण बन रहा है।
अनुमानों के मुताबिक, मानसून की वापसी शुरू होने के बाद भी बारिश का दौर पूरी तरह समाप्त नहीं होगा। नया मौसमी तंत्र ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और बाद में छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ा सकता है। इसके अलावा, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी भारी बारिश की संभावना बन सकती है। तंत्र के पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढऩे के साथ पूर्वी तट के कई इलाकों में मौसम प्रभावित हो सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार, मानसून की द्रोणिका के मध्य और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में सक्रिय रहने की संभावना है। इसका असर यह होगा कि जहां उत्तर-पश्चिम भारत धीरे-धीरे शुष्क मौसम की ओर बढ़ेगा, वहीं मध्य और पूर्वी भारत के कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश जारी रह सकती है।
राजस्थान में शुष्क मौसम की शुरुआत के संकेत मिलने लगे हैं। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी बारिश की गतिविधियों में कमी आने की संभावना है। पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में अपेक्षाकृत शुष्क परिस्थितियां बन सकती हैं, हालांकि कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
पश्चिमी भारत में गुजरात, सौराष्ट्र और कच्छ के क्षेत्रों में भी धीरे-धीरे शुष्क मौसम बढऩे की उम्मीद है। महाराष्ट्र के मुंबई, ठाणे, पालघर, पुणे, सांगली, सतारा, कोल्हापुर और रत्नागिरी सहित कई हिस्सों में मौजूदा बारिश के बाद गतिविधियों में कमी आ सकती है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून की वापसी के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम में असमान बदलाव सामान्य प्रक्रिया है। मानसून पूरे देश से एक साथ वापस नहीं लौटता। मौसम विभाग किसी क्षेत्र से मानसून की वापसी की घोषणा करने से पहले लगातार बारिश बंद होने, प्रतिचक्रवात बनने और वातावरण में नमी की मात्रा में उल्लेखनीय कमी जैसे संकेतों का आकलन करता है।
उत्तर-पश्चिम भारत में मानसून की वापसी का असर केवल बारिश तक सीमित नहीं रहता, बल्कि तापमान में भी बदलाव आने लगता है। बादल कम होने और आसमान साफ होने पर दिन के समय सूर्य की गर्मी जमीन को अधिक गर्म कर सकती है। वहीं, रात में बादलों की कमी के कारण धरती की गर्मी तेजी से बाहर निकलती है, जिससे रात के तापमान में गिरावट आ सकती है।
इससे दिन और रात के तापमान में अंतर बढ़ सकता है। ऐसे में दोपहर के समय गर्मी महसूस होने के बावजूद सुबह और शाम का मौसम अपेक्षाकृत ठंडा लग सकता है। मौसम में अचानक होने वाले इन बदलावों का असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, तापमान में उतार-चढ़ाव से शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, विशेषकर गर्मी या मौसम संबंधी तनाव की स्थिति में।
आने वाले दिनों में देश के मौसम का स्वरूप दो अलग-अलग तस्वीरें पेश कर सकता है। उत्तर-पश्चिम भारत में मानसून की वापसी के साथ शुष्क परिस्थितियां बढ़ेंगी, जबकि बंगाल की खाड़ी के ऊपर बन रहा कम दबाव का क्षेत्र पूर्वी और मध्य भारत में बारिश की गतिविधियों को सक्रिय रख सकता है। दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ हिस्सों में भी इस मौसमी तंत्र के प्रभाव से बारिश बढऩे की संभावना है।
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