कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 11 रुपये तक बढ़े, विमान ईंधन भी हुआ महंगा

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नई दिल्ली,01 सितंबर (आरएनएस)। तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने मंगलवार से व्यावसायिक उपयोग वाले रसोई गैस सिलेंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाला 19 किलो का व्यावसायिक रसोई गैस सिलेंडर देश के कई प्रमुख शहरों में महंगा हो गया है। कीमतों में शहर के अनुसार अलग-अलग बढ़ोतरी की गई है।
राजधानी दिल्ली में 19 किलो के सिलेंडर की कीमत 9.50 रुपये बढक़र 2,747.50 रुपये हो गई है। मुंबई में अब यह सिलेंडर 2,701 रुपये, जबकि चेन्नई में 2,916.50 रुपये में मिलेगा।
कोलकाता में व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमत 11.50 रुपये बढक़र 2,884 रुपये हो गई है। भुवनेश्वर और हैदराबाद में कीमत में 11-11 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इन दोनों शहरों में 19 किलो के सिलेंडर की नई कीमत क्रमश: 2,919 रुपये और 2,996 रुपये हो गई है।
बेंगलुरु में सिलेंडर की कीमत 10 रुपये बढक़र 2,831 रुपये हो गई है। तिरुवनंतपुरम में अब 19 किलो का सिलेंडर 2,784 रुपये, जबकि पटना में इसकी कीमत बढक़र 3,029 रुपये पहुंच गई है।
कीमतों में यह बदलाव 1 सितंबर से लागू हो गया है। व्यावसायिक गैस महंगी होने से होटल, रेस्तरां, ढाबों और अन्य छोटे-बड़े कारोबारों के संचालन खर्च में वृद्धि हो सकती है। इसका असर भविष्य में खाद्य पदार्थों और अन्य सेवाओं की कीमतों पर भी पडऩे की संभावना है।
व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ाए जाने के बावजूद घरेलू रसोई में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलो के सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसलिए इस बढ़ोतरी का घरेलू उपभोक्ताओं पर सीधा असर नहीं पड़ेगा।
वहीं, 5 किलो के गैर-घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में भी 2 रुपये की वृद्धि की गई है। इसकी कीमत बढक़र 764 रुपये हो गई है।
रसोई गैस के साथ ही विमानों में इस्तेमाल होने वाला विमानन टरबाइन ईंधन भी महंगा हो गया है। इसकी कीमत में 5.46 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।
घरेलू विमानन कंपनियों के लिए अब विमानन टरबाइन ईंधन की कीमत 121.28 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि इससे पहले यह 115 रुपये प्रति लीटर थी। अगस्त में भी विमान ईंधन की कीमत में करीब 5 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी।
लगातार दूसरे महीने विमान ईंधन महंगा होने से विमानन कंपनियों के ईंधन खर्च पर दबाव बढ़ सकता है। इससे विमानन क्षेत्र की परिचालन लागत प्रभावित होने के साथ भविष्य में हवाई किरायों पर भी असर पडऩे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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