सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक को स्पेशल यूएपीए कोर्ट के लिए बुनियादी सुविधा देने का निर्देश दिया

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नई दिल्ली (आरएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि राज्य सालों तक ट्रायल को लंबा खींचने की सुविधा नहीं दे सकता. अदालत ने जोर देकर कहा कि, गवाहों की जांच अंतरिम जमानत याचिकाओं से बिना किसी रुकावट के होनी चाहिए और अभियोजक को तेजी से और निष्पक्ष ट्रायल पक्का करने के लिए जरूरी गवाहों को प्राथमिकता देकर अपनी रणनीति को आसान बनाना चाहिए.सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहन की बेंच ने ये बातें कर्नाटक सरकार को यूएपीए मामलों को रोजाना देखने के लिए एक स्पेशल कोर्ट के लिए बुनियादी ढांचा देने का निर्देश देते हुए कही.बेंच पीएफआई साजिश केस में आरोपी शाहिद खान की अर्जी पर सुनवाई कर रही थी. इस केस में अभियोजन पक्ष ने कुछ सुरक्षित गवाहों समेत 707 गवाहों से पूछताछ करने का प्रस्ताव रखा है।
बेंच ने कहा कि अंतरिम जमानत अर्जी और गवाहों की जांच के बारे में राज्य की समझ गलत थी. बेंच ने कहा कि गवाहों की जांच ट्रायल का हिस्सा है और आम तौर पर सिर्फ इसलिए नहीं रुकनी चाहिए क्योंकि किसी आरोपी ने अंतरिम जमानत अर्जी दी है. बेंच ने कहा, जब कोई गवाह मौजूद होता है, तो भारत में कहीं भी गवाह को इसलिए वापस नहीं भेजा जाता क्योंकि जमानत अर्जी दी गई है.
खान की तरफ से सीनियर वकील आदित्य सोंधी ने कहा कि वह करीब चार साल से कस्टडी में था और आईपीसी के अपराधों का सामना कर रहे 9 दूसरे आरोपी, जिन पर काफी हद तक ऐसे ही आरोप थे, पहले से ही बेल पर थे.
सीनियर वकील ने कहा कि खान ने अपने ससुर की मौत के बाद सिर्फ एक अंतरिम बेल अर्जी दी थी, और वह भी खारिज कर दी गई थी. सोंधी ने बेंच से आर्टिकल 21 के तहत याचिकाकर्ता के स्पीडी ट्रायल के अधिकार पर विचार करने का आग्रह किया.
बेंच ने कर्नाटक सरकार को तुरंत जरूरी बुनियादी सुविधा देने का निर्देश दिया, जिसमें कर्नाटक हायर ज्यूडिशियल सर्विस में एक और पोस्ट बनाना, साथ ही हाई कोर्ट द्वारा तय नियमों के अनुसार जरूरी स्टाफ और दूसरी सुविधाएं देना शामिल है. सीजेआई ने आदेश में कहा, जरूरी मंजूरी दो हफ्ते के अंदर दी जाएगी.
बेंच ने देरी का जिक्र करते हुए कहा, राज्य इस ट्रायल को सालों तक खींचने की लग्जरी (सुविधा) नहीं ले सकता. बेंच ने कहा कि एक बार जब राज्य जरूरी बुनियादी ढांचा , स्टाफ और पोस्ट को मंजूरी दे देगा, तो कर्नाटक हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस स्पेशल कोर्ट की अध्यक्षता के लिए एक न्यायिक अधिकारी को नियुक्त करेंगे, जो रोजाना खास तौर पर गैरकानूनी गतिविधि अधिनियम से निपटेगा.
बेंच ने कहा कि मौजूदा केस भी स्पेशल कोर्ट को सौंपा जाएगा. बेंच ने यह साफ किया कि पीठासीन अधिकारी पहले तीन संरक्षित गवाहों की जांच करेगा, उसके बाद दूसरे जरूरी गवाहों की, ताकि यह पक्का हो सके कि अभियोजन के लिए जरूरी सबूत ज्यादा से ज्यादा तीन महीने के अंदर रिकॉर्ड हो जाएं.
बेंच ने कहा कि जरूरी गवाहों की जांच के बाद, याचिकाकर्ता को बेल पर रिहाई के लिए नए सिरे से अप्लाई करने की आजादी होगी. बेंच ने स्पेशल कोर्ट के मौजूदा कार्यभार पर भी विचार किया. बेंच को बताया गया कि मौजूदा कोर्ट में लगभग 97 ट्रायल लंबित हैं. यह तर्क दिया गया कि अलग-अलग आरोपियों द्वारा बार-बार अंतरिम बेल आवेदन करने से भी काफी कोर्ट का समय लग रहा है.
बेंच ने कहा कि उसके पहले के आदेश के बाद, यूएपीए केसों की सुनवाई के लिए कर्नाटक में स्पेशल कोर्ट बनाए गए हैं, और कहा कि स्पेशल कोर्ट के पीठासीन अधिकारी से उम्मीद है कि वह मौजूदा केस सहित केवल 12 से 15 केस ही देखेंगे.
बेंच ने कहा कि स्पेशल कोर्ट में 97 मुकदमे लंबित होने के कारण, भले ही दूसरे केसों में काफी कम गवाह शामिल हों, उन्हें पूरा होने में सालों लग सकते हैं. मौजूदा केस के बारे में बेंच ने कहा कि जब तक ट्रायल रोजाना नहीं होता, तब तक इसे सही समय में खत्म करना व्यावहारिक रूप से नामुमकिन होगा.

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