नई दिल्ली,(आरएनएस)। जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन समाप्त होने के बावजूद सोमवार को संसद में हंगामा कायम रहा. विपक्ष छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने और लाठीचार्ज के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग पर अड़ा हुआ है. वहीं, सरकार एंटी पेपर लीक बिल (लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026) पर चर्चा कराना चाहती है।
इस मुद्दे पर बोलते हुए समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया ने कहा, अच्छी बात है कि सरकार ने छात्रों से कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में बात की, उनकी मांगें मानीं और इस्तीफा लिया. लेकिन अभी भी बिहार में छात्रों पर एफआईआर दर्ज हो रहे हैं और लाठीचार्ज हो रहा है. क्या इस पर गृह मंत्री अमित शाह जी संसद में बयान नहीं दे सकते? उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी एकमात्र मांग है कि अमित शाह संसद में आकर जवाब दें, उसके बाद बिल पर चर्चा शुरू हो जाएगी।
केंद्र सरकार ने विपक्ष से नए सार्वजनिक परीक्षा विधेयक पर चर्चा में भाग लेने की अपील की है. विपक्षी दलों ने लोक परीक्षा विधेयक पर 93 संशोधन भेजे हैं. सरकारी सूत्रों के अनुसार, सरकार सदन में बिल पारित कराने की तैयारी में है.
इसी मुद्दे पर भाजपा के राज्यसभा सांसद गुलाम अली खटाना ने कहा, छात्र अपना आंदोलन खत्म कर चुके हैं, फिर भी विपक्ष को संसद नहीं चलने देने का कुछ न कुछ बहाना चाहिए. लोकसभा में इतना महत्वपूर्ण बिल, जिसकी मांग खुद विपक्ष करता रहा, नया लोक परीक्षा विधेयक सरकार लेकर आई, बावजूद इसके विपक्ष हंगामा कर रहा है।
उन्होंने कहा कि आज राज्यसभा में वंदे मातरम् बिल पर चर्चा शुरू होनी थी, मगर इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने हंगामा कर संसद को चलने नहीं दिया. यह मानसून सत्र का दूसरा हफ्ता है, पहला हफ्ता हंगामे भी भेंट चढ़ चुका है. सरकार और जनता के टैक्स के पैसे बर्बाद हो रहे हैं, फिर क्यों नहीं विपक्ष संसद चलने दे रहा है? बिहार से सांसद संजय झा ने आरोप लगाया, विपक्ष को छात्रों के आंदोलन से कोई मतलब ही नहीं था. वो तो अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे थे, वो भी छात्रों की आड़ में. सरकार की ओर से मांगें मानने के बाद छात्र अब वापस चले गए, मगर विपक्ष उन्हें दोबारा उकसा रहा है।








