पोल्ट्री उद्योग में तेजी के संकेत, वित्त वर्ष 2027 में आय में 7प्रतिशत वृद्धि का अनुमान

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भारत के पोल्ट्री सेक्टर की आय वित्त वर्ष 27 में 6-7 प्रतिशत बढऩे की उम्मीद है। इसके साथ, आय में पिछले वर्ष के मुकाबले 50 से 100 आधार अंक की बढ़ोतरी की उम्मीद है। यह जानकारी मंगलवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 26 के दौरान पोल्ट्री इंडस्ट्री के परिचालन प्रदर्शन में स्थिरता देखी गई। इसकी वजह उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी, रिटेल, इंस्टीट्यूशनल और फूड-सर्विस चैनलों में मजबूत मांग के साथ आपूर्ति-मांग की बेहतर स्थिति थी।
रिपोर्ट में कहा गया है, प्रोटीन की बढ़ती खपत, शहरीकरण, लोगों की खरीदने की क्षमता में सुधार और खान-पान की बदलती आदतों की वजह से भारत अंडे और पोल्ट्री मीट के दुनिया के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक बना हुआ है।
रिपोर्ट में बताया गया है, फीड कन्वर्जन रेश्यो (एफसीआर) को बेहतर बनाने, फार्म मैनेजमेंट के अच्छे तरीकों और कामकाज की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान देने से संगठित पोल्ट्री इंडस्ट्री में उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
रेटिंग एजेंसी ने अपने अनुमान में कहा कि प्रोटीन की बढ़ती खपत, शहरीकरण और संगठित खिलाडिय़ों द्वारा क्षमता बढ़ाने की वजह से वित्त वर्ष 27 में अंडे और मीट के उत्पादन में अच्छी रफ्तार बनी रहेगी।
संगठित रिटेल, क्विक-सर्विस रेस्टोरेंट (क्यूएसआर), कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्यात के मौकों के बढऩे से प्रोसेस्ड पोल्ट्री सेक्टर में बढ़ोतरी हो रही है। इससे लंबे समय में ग्रोथ और वैल्यू एडिशन के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।
रिपोर्ट के अनुसार, एडवांस्ड ब्रीडिंग, सटीक न्यूट्रिशन, ऑटोमेशन और बेहतर फार्म मैनेजमेंट को अपनाने से उत्पादकता और फीड कन्वर्जन रेश्यो में सुधार होने की उम्मीद है।
इस इंडस्ट्री में लगभग 60-65 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली संगठित कंपनियों ने इंटीग्रेटेड ऑपरेशन, बेहतर फीड खरीद और मजबूत प्राइसिंग अनुशासन के जरिए वित्त वर्ष 26 में मुनाफे में जबरदस्त सुधार देखा।
वित्त वर्ष 26 के दौरान, घरेलू उत्पादन बढऩे और सप्लाई की स्थिति में सुधार के कारण मक्के की कीमतों में भारी गिरावट आई। मक्के की कीमतों में इस गिरावट से मार्जिन में काफी राहत मिली, खासकर उन इंटीग्रेटेड कंपनियों को जिनके पास अपने फीड मिल और खरीद के कुशल तरीके थे।
भारत अंडे का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और ब्रॉयलर मीट का प्रमुख उत्पादक देश है। देश ने वित्त वर्ष 25 के दौरान 149.11 अरब अंडों का उत्पादन किया, जबकि पोल्ट्री मीट का उत्पादन लगभग 5.18 मिलियन टन रहा, जो भारत के कुल मीट उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा है।

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