शोएब अख्तर के भाई के अंतिम संस्कार में शामिल हुए लश्कर-ए-तैयबा के आंतकी

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पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब अख्तर के बड़े भाई शाहिद का 24 जून को इस्लामाबाद में अंतिम संस्कार (जनाजा) हुआ। उसमें आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के कई आतंकवादी शामिल हुए। इनमें एलईटी उपप्रमुख सैफुल्लाह कसूरी भी था, जिसे 2025 के पहलगाम हमले का कथित मास्टरमाइंड माना जाता है। उस हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी। वायरल वीडियो में इस्लामाबाद के एच-8 कब्रिस्तान में एलईटी नेताओं की उपस्थिति दिखाई दे रही है।
पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) के अध्यक्ष इनाम उर रहमान भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे। पीएमएमएल लश्कर-ए-तैयबा का एक राजनीतिक मोर्चा है, जिसका गठन संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी हाफिज सईद ने जमात-उद-दावा (जुद) और मिली मुस्लिम लीग जैसे अपने संगठनों पर लगे अंतरराष्ट्रीय और घरेलू प्रतिबंधों से बचने के लिए किया था। पीएमएमएल ने 2024 के पाकिस्तानी चुनावों में भी भाग लिया था।
सार्वजनिक कार्यक्रमों में कसूरी जैसे आतंकवादियों की उपस्थिति भारत विरोधी तत्वों के लिए पाकिस्तान के निरंतर समर्थन को उजागर करती है। इससे पाकिस्तान के सत्ता तंत्र में प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के प्रभाव पर भी सवाल उठते हैं। शोएब अख्तर, जिन्होंने 2011 में क्रिकेट से संन्यास ले लिया था, पाकिस्तान में एक सक्रिय कमेंटेटर हैं और उन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग में भी कमेंट्री की है। ऐसे में यह बेहद गंभीर मामला है।
पहलगाम हमले के जवाब में भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया और ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसमें रावलपिंडी से लेकर सुक्कुर तक के प्रमुख आतंकी शिविरों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इन हमलों से लश्कर और अन्य आतंकी संगठन हिल गए। कसूरी ने भारत के खिलाफ भडक़ाऊ बयान देना जारी रखा। इस साल की शुरुआत में वीडियो में उसने धमकी दी थी कि जमीन, हवा या समुद्र में दुश्मन के लिए कोई जगह नहीं बचेगी।
कसूरी ने पाकिस्तानी सेना द्वारा आतंकी समूहों को अप्रत्यक्ष समर्थन देने की बात भी स्वीकार की। उन्होंने दावा किया कि सेना अक्सर उन्हें अपने सैनिकों के अंतिम संस्कार की प्रार्थना में शामिल होने के लिए आमंत्रित करती है। कसूरी की ये हालिया भडक़ाऊ टिप्पणियां खुफिया रिपोर्टों के बीच आई हैं, जिनमें कहा गया है कि पिछले साल भारत द्वारा किए गए विनाशकारी हमलों के बाद लश्कर जैसे संगठन फिर से संगठित हो रहे हैं।

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