कनाडा ने पहली बार स्वीकार किया है कि 1985 में एयर इंडिया विमान में हुए बम धमाके के लिए कनाडा स्थित खालिस्तानी चरमपंथी जिम्मेदार थे। घटना के 4 दशक से भी ज्यादा समय बाद कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (सीएसआईएस) ने पहली बार खालिस्तानी आतंकवादियों को विमान में विस्फोटक लगाने के लिए जिम्मेदार ठहराया है। इस हमले में विमान में सवार सभी 329 लोग मारे गए थे, जिससे यह इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला बन गया था।
सीएसआईएस ने कहा, 23 जून, 1985 को कनाडा स्थित खालिस्तानी चरमपंथियों द्वारा लगाए गए बम ने विमान को नष्ट कर दिया, जिसमें सवार सभी लोग मारे गए। इनमें से अधिकांश कनाडाई नागरिक थे। यह कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला है और हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा समुदाय के लिए एक निर्णायक क्षण है। एजेंसी ने इस घटना को आतंकवाद का एक जघन्य कृत्य बताते हुए पीडि़तों को श्रद्धांजलि दी।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी पीडि़तों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए घटना को देश के इतिहास का सबसे घातक हमला बताया और हिंसक उग्रवाद से निपटने के लिए कनाडा की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने कहा, आज से 41 साल पहले, एयर इंडिया की फ्लाइट 182 में हुए बम विस्फोट में 329 निर्दोष लोगों की जान गई थी, जिनमें 268 कनाडाई नागरिक थे। यह कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला बना हुआ है।
भारत कनाडा पर यह आरोप लगाता रहा है कि वह भारत में खालिस्तानी कार्यकर्ताओं द्वारा प्रायोजित हत्याओं, मानव तस्करी और संगठित अपराध सहित अवैध गतिविधियों को नजरअंदाज करता है। कनाडा की धरती पर सक्रिय खालिस्तानी समूहों को यह समर्थन दशकों से भारत-कनाडा के बीच तनाव का कारण है। जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में इसी वजह से संबंध बेहद खराब हो गए थे। अब कनाडा की ये स्वीकारोक्ति खालिस्तान आंदोलन के प्रति उसकी धारणा में बदलाव का प्रतीक है।
एयर इंडिया की फ्लाइट 182 (कनिष्क) ने 23 जून, 1985 को टोरंटो से लंदन होते हुए मुंबई के लिए उड़ान भरी। विमान में 307 यात्री और 22 चालक दल के सदस्य सवार थे। विमान में लंदन पहुंचने से लगभग 45 मिनट हवा में ही भीषण धमाका हुआ, जिसमें सभी 329 यात्री और चालक दल के सदस्य मारे गए। मृतकों में से अधिकांश भारतीय मूल के कनाडाई, जबकि 24 भारतीय नागरिक थे। अटलांटिक महासागर से 131 शव बरामद किए गए थे।
जांच में पता चला कि खालिस्तानियों ने एक बैग में बम फिट किया था। ये भी सामने आया कि विमान में कोई एम सिंह नामक यात्री को सवार होना था, लेकिन वो सवार नहीं हुआ। केवल उसका सामान ही रखा गया। आरोप है कि बम प्रतिबंधित खालिस्तानी आतंकवादी समूह बब्बर खालसा द्वारा लगाया गया था। इस हमले को ऑपरेशन ब्लू स्टार के बदले के रूप में भी देखा जाता है।








