भीषण गर्मी के बीच भारत में मॉनसून ने दी दस्तक, जानें आपके राज्य में कब बरसेंगे बादल

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नई दिल्ली ,(आरएनएस)। चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी से बेहाल देशवासियों के लिए एक बहुत ही शानदार और बड़ी खुशखबरी आई है। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार भारत में मॉनसून का आगमन हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (ढ्ढरूष्ठ) ने आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून केरल पहुंच चुका है। हालांकि केरल में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश का दौर जारी था, लेकिन मौसम विभाग ने इसकी पुष्टि अब की है। इस बार मॉनसून अपनी सामान्य तारीख (1 जून) से करीब 4 दिन की देरी से पहुंचा है।मौसम विभाग ने शुरुआती पूर्वानुमान में जताया था कि मॉनसून 26 मई तक ही केरल में दस्तक दे सकता है, जिसमें 4 दिन की देरी या जल्दी की संभावना जताई गई थी। इस लिहाज से माना जा रहा था कि 30 मई तक बारिश शुरू हो जाएगी। लेकिन मॉनसून ने थोड़ा और इंतजार कराया और सामान्य तारीख बीतने के बाद 4 दिन की देरी से केरल के तट पर पहुंचा है।मॉनसून के आते ही केरल के कई हिस्सों में झमाझम बारिश शुरू हो गई है। ढ्ढरूष्ठ ने गुरुवार को केरल के अलप्पुझा, कोट्टायम और एर्नाकुलम जिलों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक, राज्य के कई हिस्सों में बिजली कडक़ने के साथ भारी बारिश होने और 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की पूरी संभावना है। इसके अलावा तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पत्तनमथिट्टा, इडुक्की और त्रिशूर जिलों में भी हल्की से मध्यम बारिश का अलर्ट है।
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केरल में मॉनसून की दस्तक के बाद अब उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों को उम्मीद की किरण दिखाई देने लगी है। मौसम विभाग के मॉडल के अनुसार, मॉनसून 30 जून तक पूरे देश को कवर कर लेता है। अगर बात राजधानी दिल्ली की करें, तो यहां मॉनसून पहुंचने की सामान्य तारीख 25 से 30 जून के बीच मानी जाती है। वहीं, उत्तर प्रदेश के निवासियों को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा, वहां 15 जून के आसपास मॉनसूनी बारिश दस्तक दे सकती है।
इस बार सामान्य से कम बरसेंगे बादल
मौसम विभाग ने अपने संशोधित पूर्वानुमान में एक चिंताजनक बात भी कही है। इस बार देश में मॉनसूनी बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका है। आईएमडी के मुताबिक, इस साल दीर्घकालिक औसत (रुक्क्र) की केवल 90 फीसदी बारिश होने की संभावना है। दरअसल, 1971 से 2020 तक के आंकड़ों के आधार पर देश भर में मौसमी बारिश का औसत रुक्क्र 87 सेंटीमीटर है। अगर बारिश 90 प्रतिशत से कम होती है, तो इसे ‘अपर्याप्त’ माना जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार कम बारिश होने की मुख्य वजह ‘अल-नीनो’ की स्थिति का उभरना हो सकता है।

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