एलन मस्क की कंपनी स्पेस-एक्स ने दुनिया के सबसे बड़े आईपीओ के लिए आवेदन कर दिया है। कंपनी 75 अरब डॉलर (लगभग 7,300 अरब रुपये) जुटाने की तैयारी में है। इसकी संभावित मूल्यांकन 2 लाख करोड़ डॉलर (लगभग 190 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा बताई जा रही है। अगर यह आईपीओ सफल रहता है, तो यह सऊदी अरामको के 29.4 अरब डॉलर वाले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देगा। कंपनी ने नैस्डैक पर एसपीसीएक्स नाम से लिस्टिंग की योजना बनाई है।
स्पेस-एक्स की फाइलिंग के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में कंपनी को 4.28 अरब डॉलर का शुद्ध घाटा हुआ। इसी दौरान कंपनी का कुल रेवेन्यू 4.69 अरब डॉलर रहा। कंपनी ने स्पेस प्रोजेक्ट, सैटेलाइट इंटरनेट और एआई तकनीक पर भारी निवेश किया है। वहीं, 2025 में कंपनी का कुल रेवेन्यू बढक़र 18.7 अरब डॉलर पहुंच गया। हालांकि, बड़े निवेश और नए प्रोजेक्ट्स की वजह से कंपनी के खर्च और नुकसान दोनों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है।
फाइलिंग में बताया गया कि मस्क के पास कंपनी की 85 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग पावर बनी रहेगी। उनके पास क्लास बी शेयरों का बड़ा हिस्सा है, जिनमें ज्यादा वोटिंग अधिकार दिए गए हैं। इससे आईपीओ के बाद भी कंपनी का नियंत्रण उनके हाथ में ही रहेगा। रिपोर्ट के अनुसार, गोल्डमैन सैक्स और मॉर्गन स्टेनली जैसे बड़े बैंक इस आईपीओ को संभाल रहे हैं। वहीं, रिटेल निवेशकों को भी इस लिस्टिंग में हिस्सा लेने का मौका दिया जा सकता है।
स्पेस-एक्स अब अपने स्टारलिंक इंटरनेट और एआई कारोबार को तेजी से बढ़ाने में जुटी है। कंपनी के स्टारलिंक ग्राहकों की संख्या 2023 के 23 लाख से बढक़र 2025 में करीब 89 लाख पहुंच गई है। इससे कंपनी की कमाई में बड़ा इजाफा हुआ है। दूसरी ओर, एआई कारोबार में कंपनी को पिछले साल 6.36 अरब डॉलर का नुकसान हुआ। मस्क का मानना है कि भविष्य में अंतरिक्ष डाटा सेंटर बनाकर एआई सिस्टम को सौर ऊर्जा से चलाया जा सकता है।
स्पेस-एक्स की भविष्य की बड़ी योजनाएं स्टारशिप रॉकेट पर आधारित हैं। कंपनी इसे अब तक का सबसे शक्तिशाली और दोबारा इस्तेमाल होने वाला रॉकेट बता रही है। मस्क का लक्ष्य इसी रॉकेट की मदद से इंसानों को चांद और मंगल तक पहुंचाना है। हालांकि, कंपनी ने माना है कि टेस्टिंग में देरी या तकनीकी खराबी से प्रोजेक्ट की लागत बढ़ सकती है। पिछले कुछ परीक्षणों में स्टारशिप उड़ान के दौरान फट भी चुका है, जिससे चुनौतियां बढ़ी हुई








