अभिषेक बनर्जी के शांतिनिकेतन पर चलेगा बुलडोजर

Join Us

कोलकाता,(आरएनएस)। बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद से ही एक्शन का दौर जारी है। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद शुभेंदु अधिकारी ने साफ कर दिया था कि राज्य में किसी भी अवैध निर्माण को बख्शा नहीं जाएगा और हर जगह बुलडोजर की कार्रवाई होगी। इसी कड़ी में अब राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल शख्सियत और टीएमसी के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के दो आलीशान आवासों पर कोलकाता नगर निगम (केएमसी) का डंडा चला है। नगर निगम ने अभिषेक बनर्जी के हरीश मुखर्जी रोड स्थित आवास शांतिनिकेतन और कालीघाट स्थित घर पर नोटिस चिपका दिया है। कोलकाता नगर निगम की नजर इस समय भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर 73 के अंतर्गत आने वाले 121, कालीघाट रोड और 188ए, हरीश मुखर्जी रोड स्थित संपत्तियों पर है। हरीश मुखर्जी रोड पर स्थित शांतिनिकेतन एक बेहद आलीशान और विशाल महलनुमा बंगला है, जिसमें अभिषेक बनर्जी अपने परिवार के साथ रहते हैं। वहीं, कालीघाट रोड वाला घर उनकी मां लता बनर्जी के नाम पर है, जिसे लिप्स एंड बाउंड्स की संपत्ति के रूप में दिखाया गया है। निगम द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इन दोनों आवासों के निर्माण में कुछ हिस्से तय नक्शे (सैंक्शन प्लान) से बाहर जाकर बनाए गए हैं। नोटिस के जरिए पूछा गया है कि क्या इस अतिरिक्त निर्माण के लिए नगर निगम से कोई अनुमति ली गई थी? निगम ने सख्त रुख अपनाते हुए आदेश दिया है कि नोटिस मिलने के 7 दिनों के भीतर इस अवैध हिस्से को खुद ही तोड़ दिया जाए, अन्यथा कोलकाता नगर निगम खुद बुलडोजर चलाकर इसे ध्वस्त कर देगा। इस पूरे घटनाक्रम पर कोलकाता नगर निगम के मेयर और टीएमसी नेता फिरहाद हकीम ने हैरानी जताई है। उन्होंने इस कार्रवाई से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि, मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। अभिषेक बनर्जी के घरों पर नोटिस भेजने को लेकर मुझसे (निगम के अधिकारियों द्वारा) किसी भी तरह का कोई संपर्क या बातचीत नहीं की गई थी। निगम के इस बड़े कदम और मेयर के बयान पर विपक्ष ने तीखा तंज कसा है। भारतीय जनता पार्टी के विधायक तापस रॉय ने कहा, असल में मेयर फिरहाद हकीम को अब उनकी ही संस्था में कोई मान नहीं रहा है और न ही कोई उन्हें महत्व दे रहा है। यही वजह है कि अधिकारी उनसे बात नहीं कर रहे हैं और उन्हें कुछ पता भी नहीं चल रहा है। लेकिन, अगर कानून के मुताबिक अभिषेक बनर्जी के अवैध निर्माण पर नोटिस भेजा गया है, तो यह बिल्कुल सही और सटीक कदम है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस घटना के बाद से तनाव बेहद बढ़ गया है। अब देखना यह होगा कि 7 दिनों की इस मियाद के भीतर अभिषेक बनर्जी अदालत से कोई स्थगन आदेश (स्टे) ला पाते हैं या फिर उनके शांतिनिकेतन पर सचमुच पीला पंजा (बुलडोजर) गरजने वाला है।
००

 

Previous articleपेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र पर बरसे खडग़े, कहा- नाकामियों का बोझ जनता पर डाल रही सरकार
Next articleबढ़ती महंगाई की आग में हड़तालों का घी, जनता को दोहरी मार की आशंका