किंशासा (ए.)। कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला वायरस से 80 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी हैं और 300 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आए हैं। इसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है। किसी भी महामारी के लिए ये उच्चतम स्तर की चेतावनी है। अफ्रीका रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र के अनुसार, 16 मई तक इबोला से जुड़ी 88 मौतें और 336 संदिग्ध संक्रमण मामले दर्ज किए गए हैं।
नए मामलों के पीछे वायरस के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन को जिम्मेदार माना जा रहा है। इसके इलाज के लिए फिलहाल कोई टीका या खास उपचार मौजूद नहीं है। कांगो के स्वास्थ्य मंत्री सैमुअल-रोजर कांबा ने कहा, इस स्ट्रेन की मृत्यु दर बहुत अधिक है, जो 50 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि बंडीबुग्यो स्ट्रेन से संक्रमित एक कांगो नागरिक की पड़ोसी देश युगांडा में मृत्यु हो गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने युगांडा और दक्षिण सूडान की सीमाओं के पास, पूर्वोत्तर कांगो के इटुरी प्रांत में नए मामले मिलने की पुष्टि की है। कांगो सरकार ने बताया कि के अनुसार, सबसे पहले 24 अप्रैल को बुनीया की रहने वाली एक नर्स संक्रमित हुई थी। इसके बाद से नए स्ट्रेन के 8 मामले सामने आए हैं। बुनीया, रवामपारा और मोंगवालू इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। युगांडा, केन्या और सूडान ने निगरानी बढ़ा दी है।
डब्ल्यूएचओ ने कहा कि शनिवार तक कांगो के इटुरी प्रांत में कम से कम 3 क्षेत्रों में 80 संदिग्ध मौतें, 8 कंफर्म मामले और 246 संदिग्ध मामले रिपोर्ट किए गए हैं।
डब्ल्यूएचओ ने कहा, बुंडीबुग्यो वायरस से फैला यह प्रकोप महामारी आपातकाल के मानदंडों को पूरा नहीं करता है, लेकिन कांगो के साथ सीमा साझा करने वाले देशों में ज्यादा जोखिम है। संक्रमित लोगों को अंतरराष्ट्रीय यात्रा नहीं करनी चाहिए, सिवाय तब जब यह किसी मेडिकल इवैकुएशन का हिस्सा हो।
इबोला वायरस पहली बार 1976 में अफ्रीका में सामने आया था। उस समय सूडान और तत्कालीन जायरे (अब कांगो) में इसके मामले मिले थे। यह संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी और शरीर के दूसरे तरल पदार्थ के संपर्क से फैलता है। कांगो में कई बार इसके मामले सामने आ चुके हैं। अब ये इसका 17वां प्रकोप है। 2014 से 2016 के बीच पश्चिम अफ्रीका में इबोला से 11,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।








