उमरिया,(आरएनएस)। विश्वप्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में एक बार फिर बाघ की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने से वन विभाग और प्रबंधन पर सवाल खड़े हो गए हैं। खितौली परिक्षेत्र के पश्चिम बगदरी बीट इलाके में रविवार सुबह एक नर बाघ मृत अवस्था में मिला। प्रारंभिक जांच में पार्क प्रबंधन ने इसकी वजह बाघों के बीच आपसी संघर्ष को बताया है, लेकिन घटना को लेकर कई तरह की शंकाएं भी सामने आ रही हैं।जानकारी के मुताबिक रविवार सुबह करीब साढ़े छह बजे ढमढमा कैंप के सुरक्षा कर्मियों ने जंगल में बाघों के लडऩे जैसी आवाजें सुनीं। इसके बाद गश्ती दल ने इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। करीब तीन घंटे की तलाश के बाद एक बाघ का शव बरामद किया गया।सोमवार को सबांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने बताया कि मृत बाघ की पहचान पुजारी नामक नर बाघ के रूप में हुई है, जिसकी उम्र करीब आठ वर्ष बताई जा रही है। उन्होंने कहा कि बाघ के शरीर पर हमले के निशान मिले हैं और प्रथम दृष्टया मामला आपसी संघर्ष का लग रहा है। मौके पर बाघ के सभी अंग सुरक्षित पाए गए हैं।प्रबंधन का दावा है कि यह बाघ अक्सर बी-1 नामक दूसरे बाघ से डरता था और उसे देखते ही इलाके से हट जाता था। आशंका जताई जा रही है कि दोनों का आमना-सामना होने पर संघर्ष हुआ होगा, जिसमें पुजारी की मौत हो गई।हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल भी उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि यदि संघर्ष इतना गंभीर था कि एक बाघ की मौत हो गई, तो दूसरा बाघ घायल अवस्था में क्यों नहीं मिला।
यही नहीं, पहले भी बांधवगढ़ में बाघों की मौत के मामलों में अक्सर “आपसी संघर्ष” की बात सामने आती रही है, लेकिन दूसरे बाघ के घायल होने के प्रमाण नहीं मिले।घटना के बाद क्षेत्र की घेराबंदी कर दी गई है। जांच के लिए हाथी गश्ती दल, डॉग स्क्वाड और मेटल डिटेक्टर टीम को भी लगाया गया है। वन विभाग का कहना है कि आगे की कार्रवाई राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (हृञ्जष्ट्र) की गाइडलाइन और एसओपी के तहत की जा रही है।बांधवगढ़ में लगातार सामने आ रही बाघों की मौत की घटनाओं ने एक बार फिर टाइगर संरक्षण और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग भी उठने लगी है।








