अमेरिका ने हिंद महासागर में तैनात किया तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर, मध्य पूर्व में युद्ध की आहट

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वॉशिंगटन,(ए.)। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका की दोहरी रणनीति ने दुनिया को हैरत में डाल दिया है। एक ओर अमेरिकी प्रशासन ईरान के साथ सीजफायर बढ़ाने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर समुद्र में सैन्य जमावड़ा किसी बड़े हमले की ओर इशारा कर रहा है। ताजा सैन्य गतिविधियों के तहत अमेरिकी नौसेना ने हिंद महासागर और अरब सागर के क्षेत्र में अपनी ताकत को कई गुना बढ़ा दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, परमाणु शक्ति संपन्न विमानवाहक पोत यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश अब हिंद महासागर में तैनात हो चुका है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस भारी तैनाती का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक करना है।होर्मुज जाने वाले जहाज अरब सागर से ओमान की खाड़ी होते हुए फारस की खाड़ी में प्रवेश करते हैं। इस मार्ग पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए अब अमेरिका के पास क्षेत्र में एक साथ तीन एयरक्राफ्ट कैरियर मौजूद हैं। इराक और अफगानिस्तान युद्ध के बाद यह पहला अवसर है जब अमेरिकी नौसेना ने एक साथ इतनी बड़ी मारक क्षमता इस इलाके में झोंकी है। वर्तमान में यूएसएस अब्राहम लिंकन अरब सागर में मोर्चा संभाले हुए है, जबकि दुनिया का सबसे आधुनिक युद्धपोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड लाल सागर में सक्रिय है। अब तीसरे कैरियर की एंट्री ने अमेरिकी सैन्य शक्ति को चरम पर पहुंचा दिया है। यूएसएस जॉर्ज बुश के साथ मिसाइलों से लैस डेस्ट्रॉयर यूएसएस मेसन, यूएसएस डोनाल्ड कुक और यूएसएस रॉस जैसे युद्धपोत भी चल रहे हैं। साथ ही हाई-स्पीड सप्लाई शिप यूएसएनएस आर्कटिक ईंधन और रसद की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा है। दिलचस्प बात यह है कि इस कैरियर ग्रुप ने लाल सागर के खतरों से बचने के लिए अफ्रीका के दक्षिणी सिरे से करीब 18,507 किलोमीटर का लंबा रास्ता तय कर हिंद महासागर में प्रवेश किया है। इस भारी सैन्य दबाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर बढ़ाने का ऐलान तो किया है, लेकिन साथ ही 10,000 अतिरिक्त सैनिकों और मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट्स को क्षेत्र में भेजने का आदेश देकर इरादे स्पष्ट कर दिए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका बातचीत और दबाव की रणनीति पर काम कर रहा है। तीन विमानवाहक पोतों की मौजूदगी का सीधा मतलब है कि यदि कूटनीति विफल होती है, तो अमेरिका चंद मिनटों में होर्मुज को पूरी तरह बंद कर ईरान की आर्थिक कमर तोडऩे की क्षमता रखता है। वैश्विक स्तर पर इस तैनाती को एक बड़े अटैक प्लान की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

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