लखनऊ(ए.)। महिला आरक्षण अधिनियम के लागू होने और इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के साथ ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया के माध्यम से कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। मायावती ने विशेष रूप से कांग्रेस की तुलना गिरगिट से करते हुए दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को इन दलों के दोहरे चरित्र से सावधान रहने की सलाह दी है।
बसपा प्रमुख ने कहा कि आज जो कांग्रेस महिला आरक्षण में एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों की भागीदारी की बात कर रही है, वही पार्टी केंद्र की सत्ता में रहते हुए इन वर्गों के आरक्षण कोटे को पूरा करने में हमेशा विफल रही। उन्होंने याद दिलाया कि ओबीसी समाज के लिए मंडल कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की पहल कांग्रेस ने नहीं, बल्कि बसपा के अथक प्रयासों से पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह की सरकार ने की थी। मायावती ने सपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पिछड़ी मुस्लिम जातियों को ओबीसी का लाभ देने वाली 1994 की रिपोर्ट को सपा सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था, जिसे बाद में 1995 में बसपा सरकार ने लागू किया। उनके अनुसार, सपा जब सत्ता में होती है तो उसका रवैया जातिवादी और तिरस्कारी होता है, लेकिन विपक्ष में आते ही वह राजनैतिक स्वार्थ के लिए रंग बदल लेती है।परिसीमन के मुद्दे पर मायावती ने स्पष्ट किया कि यदि महिला आरक्षण को जल्दी लागू करना है, तो इसे 2011 की जनगणना के आधार पर ही करना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि आज कांग्रेस सत्ता में होती, तो वह भी भाजपा की तरह ही कदम उठाती। मायावती ने जोर देकर कहा कि देश में एससी, एसटी, ओबीसी और मुस्लिम समाज के वास्तविक हितों को लेकर कोई भी दल गंभीर नहीं है। उन्होंने इन वर्गों के लोगों को सलाह दी कि वर्तमान में जो कुछ भी मिल रहा है, उसे स्वीकार कर लें और किसी के बहकावे में न आएं। उन्होंने आह्वान किया कि इन वर्गों को खुद अपने पैरों पर खड़ा होकर समाज को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाना होगा, क्योंकि भविष्य में सही समय आने पर ही उनके हितों का पूर्ण ध्यान रखा जा सकेगा।








