गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर लखनऊ रवाना हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

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वाराणसी,(ए.)। बहुत ही दुर्भाग्य की बात है कि धर्म युद्ध के लिए निकलना पड़ा……अपने ही देश में, अपने ही वोट से चुनी गई सरकार के सामने, अपनी ही गौ-माता को बचाने के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ये बातें काशी में लखनऊ रवाना होने से पहले कही। शंकराचार्य ने इस आंदोलन को गौ प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध सभा का नाम दिया। वे 11 मार्च को लखनऊ पहुंचने वाले है। यहां हजारों संतों की मौजूदगी में सभा करने वाले है। इसमें केंद्र सरकार से गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग की जाएगी। शंकराचार्य ने 30 जनवरी को योगी सरकार को 40 दिन का अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने कहा था- गाय को राष्ट्रमाता घोषित करें…वरना मैं आंदोलन करुंगा। शंकराचार्य काशी से जौनपुर, सुल्तानपुर, अमेठी, रायबरेली, उन्नाव, हरदोई, सीतापुर होकर 5 दिन बाद लखनऊ पहुंचने वाले है। यात्रा में 20 से अधिक गाडिय़ां हैं। 500 से अधिक श्रद्धालु साथ हैं। इस दौरान लोगों को पोस्टर बांटे गए। इनमें लिखा है…..जिंदा हिंदू लखनऊ चलें। इससे पहले, शंकराचार्य सुबह 8.30 बजे मठ से निकलकर गौशाला पहुंचे। गाय की पूजा की। फिर पालकी पर सवार हुए।
मठ से 300 मीटर दूर स्थित चिंतामणि गणेश मंदिर पहुंचे। यहां 11 बटुकों ने उनका स्वागत किया। फिर पूजा-अर्चना कर संकट मोचन मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने हनुमान चालीसा का पाठ किया और अपने संकल्प को दोहराया। इसके बाद शंखनाद और जयकारों के बीच अपनी वैनिटी वैन से लखनऊ के लिए रवाना हुए।
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के लखनऊ में स्वागत वाले बयान पर शंकराचार्य ने कहा कि जिसके मन में जो है, यही मौका है, बोल दे। जो गाय के पक्ष में है, वहां बोल रहा है। अपनी अभिव्यक्तियों से वे बता रहे हैं कि हम किधर हैं।

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