आज फाल्गुन मास की अमावस्या है। श्रद्धालु अमावस्या के अवसर पर स्नान-दान और पूजा-पाठ कर रहे हैं। वहीं खगोल विज्ञान की दृष्टि से भी आज का दिन विशेष है, क्योंकि आज वलयाकार सूर्य ग्रहण लग रहा है। इस प्रकार के ग्रहण को विज्ञान की भाषा में ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। इस ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य के लगभग 96 प्रतिशत हिस्से को ढक लेगा।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह सूर्य ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लग रहा है। सनातन परंपरा में ग्रहण को महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में लोगों के मन में कई सवाल हैं—ग्रहण का समय क्या है? क्या यह भारत में दिखाई देगा? क्या इसका सूतक काल मान्य होगा? आइए जानते हैं इन सवालों के जवाब।
सूर्य ग्रहण का समय (भारतीय समयानुसार):
प्रारंभ: दोपहर 3:26 बजे
चरम (पीक): शाम 5:13 बजे से 6:11 बजे के बीच
समाप्ति: शाम 7:57 बजे
कुल अवधि: लगभग 4 घंटे 32 मिनट
यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। साल का यह पहला सूर्य ग्रहण दक्षिणी अफ्रीका, अंटार्कटिका और दक्षिण अमेरिका के कई देशों में नजर आएगा। इनमें जिम्बाब्वे, नामीबिया, जाम्बिया, तंजानिया, मॉरीशस, बोत्सवाना, मोजाम्बिक, चिली और अर्जेंटीना शामिल हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। हालांकि, सूतक काल तभी मान्य होता है जब ग्रहण संबंधित स्थान पर दिखाई दे। चूंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं माना जाएगा। धर्म शास्त्रों के अनुसार सूतक काल को अशुभ समय माना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ और शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। मान्यता है कि सूतक काल में किए गए शुभ कार्यों का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।








