भारत बंद का रहा मिला-जुला असर

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नई दिल्ली, (ए.)। भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते और नए लेबर कोड को लेकर उपजा विवाद अब सडक़ों पर उतर आया है। विपक्षी दलों, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और विभिन्न किसान संगठनों की ओर से गुरुवार को बुलाए गए भारत बंद का असर देश के कई हिस्सों में देखा जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि यह समझौता भारतीय कृषि और स्थानीय व्यापार के हितों के खिलाफ है।विपक्षी दलों और किसान संगठनों की केन्द्र सरकार से श्रम कोड, बिजली बिल-2025, बीज बिल और वीबी-जी-राम-जी एक्ट, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, न्यूनतम वेतन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की वापसी सहित अन्य मांगे शामिल हैं।इस हड़ताल का सबसे ज्यादा असर बैंकिंग, परिवहन और सरकारी सेवाओं पर दिखने की संभावना है। दिल्ली के प्रमुख व्यापारिक संगठनों ने भी किसानों की मांगों के समर्थन और स्थानीय व्यापारिक मुद्दों को लेकर दिल्ली बाजार बंद का समर्थन किया है।केंद्र सरकार की कुछ हालिया नीतियों और प्रस्तावित बिलों के खिलाफविपक्षी दलों ने तीखा हमला बोला है। कांग्रेस और अन्य विपक्ष के सांसदों ने संसद भवन के मकर द्वार पर जनहित की आवाज बुलंद करते हुए विरोध प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दबाव में आकर भारतीय किसानों के भविष्य को खतरे में डाल दिया है। देश के सम्मान से खिलवाड़ किया है। देश उन्हें माफ नहीं करेगा।विपक्षी सांसदों ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में जनविरोधी प्रावधानों का विरोध किया और कहा कि वे अपने किसानों के साथ मजबूती से खड़े हैं। उनके लिए भारत का हित सर्वोपरि हैं। अखिल भारतीय बंद का आह्वान करने वाले किसानों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए, क्योंकि व्यापार समझौते जनता के हित में होने चाहिए, न कि दबाव बनाने के लिए।इसी बीच नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक जनसभा आयोजित की गई। ऑल इंडिया किसान यूनियन (एआईकेएस) के महासचिव विजू कृष्णन, सेंट्रल इंडियन ट्रेड यूनियन(सीआईटीयू) के अध्यक्ष सुदीप दत्ता और अन्य नेता उपस्थित थे।वहीं, माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के अनुसार त्रिपुरा में कई स्थानों पर रेल और सडक़ परिवहन ठप है। बड़ी संख्या में दुकानें और प्रतिष्ठान बंद हैं। हड़ताली कार्यकर्ता सडक़ों पर उतर आए हैं और लोगों से आम हड़ताल के समर्थन में खड़े होने का आह्वान कर रहे हैं । यही स्थिति छत्तीसगढ़ के कोरबा और तेलंगाना के सिंगारेनी में भी है।

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