राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल, फिर मुख्य मांगों को दोहराया

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नई दिल्ली, (ए)। लोकसभा में बुधवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर दोबारा जोरदार हमला बोला। सदन में दिए गए भाषण के साथ ही बाद में एक ट्वीट के माध्यम से भी उन्होंने अपनी प्रमुख मांगों की याद दिलाई। उनके अनुसार चुनाव आयोग यदि इन मांगों को मान ले तो चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर एक पोस्ट करते हुए कहा, कि उनकी मांगें केवल विपक्ष की शिकायतें नहीं, बल्कि पिछले एक दशक में चुनाव आयोग पर लगे आरोपों, जैसे ईवीएम में छेड़छाड़, मतदाता सूची में गड़बड़ी और संस्थागत दखल का सार हैं। इन्हीं आधारों पर वे लगातार वोट चोरी के आरोप भी लगाते रहे हैं।अपने भाषण में राहुल गांधी ने आरोप लगाया, कि भाजपा और आरएसएस ने चुनाव आयोग सहित कई महत्वपूर्ण संस्थाओं पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है, जिससे लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। उन्होंने तीन अहम सवाल उठाए, जिनमें मुख्य न्यायाधीश को चुनाव आयुक्त चयन समिति से क्यों हटाया गया, चुनाव आयुक्तों को कानूनी कार्रवाई से इम्यूनिटी क्यों दी गई, और अंतिम सीसीटीवी फुटेज से संबंधित नियम क्यों बदले गए।
इस पर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है, कि राहुल की मांगों को यदि राजनीतिक नजरिये से हटकर देखा जाए तो इन्हें लागू करने से चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और मजबूत हो सकती है। हालांकि यह भी स्पष्ट है कि ऐसी मांगों का अंत नहीं होता, लेकिन लोकतंत्र की मजबूती के लिए सुधारों पर चर्चा और कार्रवाई को सकारात्मक कदम माना जाता है।

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