इधर पुतिन भारत तो मैक्रों चीन यात्रा में बिजी, उधर ट्रंप ने दो देशों में कराया समझौता

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-कांगो और रवांडा के बीच कराई शांति डील, नाम दिया वाशिंटगन अकॉर्ड
वाशिंगटन,(ए)। वैश्विक राजनीति के हिसाब से दिसंबर माह खास है क्योंकि रूस के राष्ट्रपति पुतिन भारत आए हुए हैं। वहीं, फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों इस समय चीन यात्रा पर हैं। इस सब के बीच खुद को शांति का दूत कहने वाले डोनाल्ड ट्रंप ने दो और देशों कांगो और रवांडा के बीच शांति समझौता करवा दिया है। ट्रंप ने दोनों देशों के बीच में शांति समझौते और रेयर अर्थ मिनरल डील को साइन किया। उन्होंने इस समझौते को वाशिंटगन अकॉर्ड नाम दिया। हालांकि, क्या इस समझौते के बाद 30 साल से चला आ रहा संघर्ष खत्म हो जाएगा इस पर संशय बना हुआ है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद संबोधन भी दिया। ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों ने एक-दूसरे को मारने में बहुत समय बिताया है। अब ऐसा नहीं होगा…अब यह बहुत समय गले मिलने, हाथ पकडऩे और अमेरिका की आर्थिक मदद करके सभी का फायदा करने में बिताएंगे, जैसा की हर देश करता है।
बता दें ट्रंप और उनकी टीम ने इस समझौते को वॉशिंगटन अकॉड्र्स नाम दिया है। इस समझौते को उस संस्थान में साइन किया गया, जिसे पहले यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस कहा जाता था। एक दिन पहले ही ट्रंप प्रशासन ने इसका नाम बदलकर ट्रंप के नाम पर रखा है। बता दें शांति समझौते के साथ ही अमेरिका और कांगो ने रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर भी समझौता किया। इसके तहत अहम खनिजों, सोने और रेयर अर्थ मेटस्ल का रणनीतिक भंडारण किया जाएगा। कांगो के राष्ट्राध्यक्ष की तरफ से वादा किया कि इन संसाधनों के विकास के लिए अमेरिकी कंपनियों को प्राथमिकता दी जाएगी। इतना ही नहीं कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिज को लेकर भी दोनों देशों के बीच में साझेदारी हुई।
बता दें कांगो में लगातार गृहयुद्ध के हालात बने हुए हैं। इनमें से एक विद्रोही गुट एम23 को रवांडा का समर्थन मिला हुआ है। ऐसे में अमेरिका ने हस्तक्षेप करके इस संगठन को रोका और राष्ट्रपति फेलिक्स त्शिसेकेदी की सरकार गिरने से बचा ली। विद्रोही गुट लगातार शहरों पर कब्जा करते रहे। ट्रंप दावा करते रहे हैं कि उन्होंने कांगो और रवांडा के बीच शांति समझौता करवाया है। हालांकि, उनकी इन बातों पर विश्लेषकों का रुख अलग है। उनकी मानें तो ट्रंप द्वारा जो शांति समझौते करवाए गए हैं, वह वास्तव में जमीनी स्तर पर उतर ही नहीं पाए।

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