नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया-राहुल के खिलाफ नई एफआईआर, आपराधिक साजिश रचने का आरोप

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नईदिल्ली (आरएनएस)। नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने दोनों नेताओं के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज की है। इसमें आपराधिक साजिश रचकर कांग्रेस से जुड़ी कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) पर धोखाधड़ी से कब्जा करने का आरोप लगाया गया है। एफआईआर में राहुल-सोनिया के अलावा इंडियन ओवरसीज कांग्रेस प्रमुख सैम पित्रोदा और 3 अन्य लोगों के भी नाम हैं।
यह एफआईआर 3 अक्टूबर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की शिकायत पर दर्ज हुई है। ईडी ने अपनी जांच रिपोर्ट दिल्ली पुलिस के साथ साझा की थी, जिसमें पीएमएलए की धारा 66(2) के तहत अनुसूचित अपराध दर्ज करने की सिफारिश की गई थी। इसमें एजेएल, यंग इंडियन और डोटेक्स मर्चेंडाइज नामक 3 कंपनियों को भी आरोपी बनाया गया है। डोटेक्स कोलकाता की एक शेल कंपनी है, जिसने कथित तौर पर यंग इंडियन को एक करोड़ रुपये दिए थे।वहीं, दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी के आरोप पत्र पर संज्ञान लेने का फैसला तीसरी बार टाल दिया है। ईडी ने इस मामले में पीएमएलए के तहत सोनिया, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे और कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को आरोपी बनाया है। कोर्ट ने 14 जुलाई को बहस पूरी होने के बाद 29 जुलाई तक फैसला सुरक्षित रखा था। इसके बाद 8 अगस्त और 29 नवंबर को फैसला टाल दिया गया।2013 में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने एक याचिका दायर कर राहुल और सोनिया पर नेशनल हेराल्ड अखबार चलाने वाली कंपनी एजेएल के अधिग्रहण में धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। उनका आरोप था कि यंग इंडिया लिमिटेड (वाईआईएल) के जरिए इसका गलत तरीके से अधिग्रहण किया गया और इससे कांग्रेस नेताओं ने 2,000 करोड़ रुपये की संपत्ति हथिया ली। सोनिया और राहुल के पास वाईआईएल में 38-38 प्रतिशत शेयर हैं। मामले में सोनिया-राहुल से पूछताछ हुई है।
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस का प्रथम परिवार सबसे भ्रष्ट परिवार है। उन्होंने कहा, यह भ्रष्टाचार करता है, यह सोचता है कि यह उनका अधिकार है और अगर कार्रवाई होती है, तो वे पीडि़त कार्ड खेलना शुरू कर देते हैं। अभी किसी भी अदालती मामले ने नेशनल हेराल्ड की कार्यवाही को नहीं रोका है। राहुल-सोनिया को इससे कोई राहत नहीं मिली है। इसे किसी सरकार ने शुरू नहीं किया। यह जमीन चोरी का एक अनोखा मामला है।

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