इमरान खान को लेकर पाकिस्तान में बवाल; जेल की सुरक्षा बढ़ाई गई, पीटीआई कार्यकर्ता सडक़ों पर

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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। उनके परिवार का आरोप है कि उन्हें इमरान से मिलने नहीं दिया जा रहा है। इस बीच इमरान रावलपिंडी की जिस अडियाला जेल में बंद हैं, उसकी सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है। पूरे प्रांत को हाई अलर्ट पर रखा गया है और हजारों अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई है। सोशल मीडिया पर इमरान की मौत की अफवाहें भी हैं।
सूत्रों के मुताबिक, अडियाला जेल में हालिया सालों की सबसे सख्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है। इस्लामाबाद और पंजाब पुलिस ने जेल के आसपास 2,500 अतिरिक्त कर्मियों को तैनात किया है। दहगल क्षेत्र, जेल गेट नंबर 1, गेट नंबर 5, फैक्ट्री नाका और रावलपिंडी के गोरखपुर जोन में 5 नई सुरक्षा चौकियां स्थापित की गई हैं। सुरक्षाकर्मियों को रबर की गोलियों, आंसू गैस, डंडों और दंगा-रोधी उपकरणों से लैस किया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा किसी भी अवांछित स्थिति से निपटने के लिए बनाया गया है। पुलिस अधीक्षक अनम शेर को जेल की सुरक्षा व्यवस्था का काम सौंपा गया है। अडियाला जेल के अलावा लाहौर की कोट लखपत जेल की भी सुरक्षा बढ़ाई गई है। यहां इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के कई नेता और कार्यकर्ता बंद हैं। बलूचिस्तान में क्वेटा से 60 किलोमीटर दूर स्थित माच जेल में भी सतर्कता बढ़ाई गई है।
पीटीआई कार्यकर्ताओं ने पूरे पाकिस्तान में प्रदर्शन का ऐलान किया है। पीटीआई को कई विपक्षी पार्टियों का भी साथ मिला है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी और इमरान की बहन अडियाला जेल के बाहर धरने पर बैठी हैं। यहां सुरक्षाबलों ने अफरीदी के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की और उन्हें सडक़ पर गिरा दिया। पीटीआई ने ऐलान किया है कि 30 नवंबर को वो अमेरिका के वॉशिंगटन स्थित दूतावास के बाहर प्रदर्शन करेगी।
इमरान की बहन नोरीन नियाजी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इमरान को कुछ हुआ तो कोई नहीं बचेगा। उन्होंने कहा, हमने 4-5 हफ्ते से इमरान से बात नहीं की है। उनसे मिले नहीं है, देखा भी नहीं है। हमें उनकी फिक्र है, क्योंकि पहले भी उनकी जान लेने की कोशिश हुई है। इमरान को नुकसान पहुंचाने की कोई सोचे भी नहीं। अगर किसी ने कोशिश भी की तो कोई भी नहीं बचेगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री के राजनीतिक सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने इमरान और उनके परिजनों के बीच कुछ शर्तों के साथ मुलाकात कराने का समर्थन किया है। उन्होंने कहा, मुलाकात के लिए अनुमति होनी चाहिए, लेकिन एक घंटे की बैठक के बाद 90 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं हो सकती। कोई भी कानून इसकी इजाजत नहीं देता। बैठक के दौरान राजनीतिक चर्चा नहीं हो सकती। कानून किसी कैदी को जेल से आंदोलन चलाने की अनुमति नहीं देता।

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