महिला फिदायीन तैयार कर रहे आंतकी संगठन

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 खुफिया एजेंसी को मिली लश्कर-ए-तैयबा की गुप्त साजिश की जानकारी

नई दिल्ली (ए)। पाकिस्तान में सक्रिय कुछ आतंकी संगठनों द्वारा महिलाओं और लड़कियों को खुले तौर पर कट्टरपंथी विचारधारा में ढालकर उन्हें फिदायीन (आत्मघाती) गतिविधियों के लिए भी तैयार किया जा रहा है। ये दावा खुफिया सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स में हुआ है। एक रिपोर्ट और लीक हुई फुटेज में लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) जैसे संगठनों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का जिक्र है, जिसमें भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुश्मन के रुप में दिखाया गया है।
भारतीय खुफिया एजेंसियों के मुताबिक,संचालित अभियान 26 निर्दोष नागरिकों की जान ले चुके पहलगाम हमले और उसके बाद ऑपरेंशन सिंदूर के बाद और सक्रिय हुआ है। लीक हुई क्लिपों में एलईटी के फांउडर हाफिज अब्दुर रऊफ और अन्य ट्रेनरों को महिलाओं के लिए लाइव ऑनलाइन सत्र चलाते दिखाया गया है, जिसमें भर्ती, ब्रेनवॉश और जिहाद की व्याख्या शामिल है। रऊफ का नाम पिछले कुछ वर्षों में जिहादी नेटवर्क के सक्रिय नेताओं में आता रहा है और उसके नेतृत्व में प्रशिक्षण शिविर चलने की सूचनाएं मिली हैं।रिपोर्ट में बताया गया हैं कि एलईटी अब सिर्फ पारंपरिक लड़ाकू प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहा, इसके सामाजिक, शैक्षिक और राजनीतिक मोर्चे भी सक्रिय हैं। संगठन ने कथित तौर पर पीएमएमएल (एलईटी का राजनीतिक मोर्चा), मुसलमान यूथ लीग और मुसलमान महिलाएं/ लड़कियों की लीग जैसे नागरिक-आधारित मंच बनाए हैं, जिनके जरिये महिलाओं को ‘सशक्तिकरण’ के आड़े कट्टर विचारों से जोड़ा जा रहा है। खुफिया एजेंसियों को मिले इन फुटेज में स्थानीय सैन्य या पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी का संकेत भी है, जिसे जांच अमल में ले रही एजेंसियां गंभीरता से देख रही हैं।वीडियो क्लिपों में एलईटी के एक अन्य सदस्य इम्तियाज अहमद मक्की महिलाओं को संबोधित कर कहता दिखाई देता है कि भारत और मोदी उनका सबसे बड़ा दुश्मन हैं और अब उनका जिहाद पीएमएमएल के माध्यम से आगे बढ़ेगा। खुफिया स्रोतों का कहना है कि इन गतिविधियों का उद्देश्य न केवल लड़ाकू लक्ष्यों के लिए महिलाओं को तैयार करना है, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक स्तर पर भी कट्टरवाद पनपाना है घरों, स्कूलों और समुदायों में प्रभाव फैलाना।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि शैक्षिक व सामाजिक रूप में छिपे इसतरह के नेटवर्क की सटीक पहचान और विघटन के लिए बहु-राष्ट्रीय खुफिया साझेदारी और लोकल निगरानी आवश्यक होगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फुटेज और सूचनाओं की तर्ज पर आगे की कानूनी और खुफिया कार्रवाई जारी है, जबकि मीडिया रिपोर्ट्स इस खतरनाक प्रवृत्ति की ओर वैश्विक ध्यान खींच रही हैं।

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