भोपाल (निप्र)। स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी, — दिवाली के पूर्व सजे इस खुशनुमा मौसम में क्लब लिटराटी ने एक साहित्यिक संध्या का आयोजन किया, जिसमें मध्य प्रदेश के सुप्रसिद्ध लेखक संजय जैन के कहानी संग्रह खुली दराज़ और बिखरी ख़ुशबूएँ पर एक प्रेरक और विचारोत्तेजक चर्चा हुई, जो वाकई सामाजिकता के लिए प्रेरक रही जिसमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता परिलक्षित सवालों जो दर्शकों की ओर से किये गये उनके सटीक और सारगर्भित जवाब संजय जैन ने दिये। कार्यक्रम में मौजूद रहे वरिष्ठ पत्रकार, व साहित्यकार श्री के.के सक्सेना, साहित्यकार एवं पत्रकार डॉ राजेश तिवारी, साधना गंगराडे, लेखिका संघ, डॉ मोहन तिवारी समालोचक चंद्रभान जी सहित कई गणमान्य साहित्य प्रेमियों ने कार्यक्रम में शिरकत की। कहानियों के इस संग्रह में संवेदनशीलता बहुल रूप से उपस्थित है, जो लेखक के सामाजिक लगाव को प्रबलता से दर्शाती है। ये कहानियाँ समय और समाज के यथार्थ को गहराई से देखती हैं और हर वर्ग के पाठकों के लिए समान रूप से पठनीय हैं। कार्यक्रम का संचालन परितोष दुबे ने किया और चर्चा का मॉडरेशन श्रीमती रेखा कस्तवार द्वारा किया गया। विचार विमर्श के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि संजय जैन की रचनाएँ केवल कथाएँ नहीं, बल्कि समाज के बदलते स्वरूप का दस्तावेज़ हैं — जहाँ हर पात्र जीवन के यथार्थ को प्रतिबिंबित करता है। संजय जैन ने अपने संबोधन में कहा — मैं रचनात्मकता का हिस्सा बनना चाहता हूँ। लेखन मेरे लिए समाज से संवाद का माध्यम है। उन्होंने यह भी साझा किया कि हर कहानी उनके अनुभवों और संवेदनाओं की उपज है, जो पाठकों के दिल तक पहुँचने की आकांक्षा रखती है। इस अवसर पर क्लब लिटराटी की अध्यक्ष डॉ. सीमा राय रायज़ादा ने कहा, किताब की चर्चा में ख़ुशबू उसी तरह से बिखरी, जिस तरह शरद ऋतु में पारिजात अपनी ख़ुशबू के साथ बिखरता है। गौरतलब है कि संजय जैन, मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग में संयुक्त संचालक के पद पर कार्यरत हैं। उनकी कहानियाँ, यात्रा संस्मरण, समीक्षाएँ और समसामयिक विषयों पर लेख देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होते रहे हैं। साहित्यप्रेमियों और पाठकों से सजी यह संध्या संवेदना, विचार और शब्दों की ख़ुशबू से सराबोर रही।








