लखनऊ (ए)। राजधानी लखनऊ में साइबर ठगी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने सबको सकते में डाल दिया है। जालसाजों ने इस बार ठगी का एक नया और खौफनाक तरीका अपनाते हुए केंद्रीय मंत्रालय से रिटायर एक संयुक्त निदेशक को 48 घंटे तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा। मनी लॉन्ड्रिंग और 200 महिलाओं को अश्लील संदेश भेजने जैसे गंभीर आरोपों में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी और उनसे 12 लाख रुपये की मोटी रकम ऐंठ ली। पीडि़त की तहरीर पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।मामला गोमतीनगर के विरामखंड का है, जहां रहने वाले 77 वर्षीय कृपा शंकर गौतम, जो केंद्रीय मंत्रालय में संयुक्त निदेशक के पद से सेवानिवृत्त हैं, इस शातिर गिरोह का शिकार बने। कृपा शंकर ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि इस खौफनाक सिलसिले की शुरुआत 2 सितंबर को एक अनजान नंबर से आए फोन कॉल से हुई। फोन करने वाली महिला ने खुद को टेलीकॉम कंपनी की कर्मचारी बताते हुए कहा कि उनका सिम कार्ड दो घंटे में बंद कर दिया जाएगा। जब उन्होंने वजह पूछी तो महिला ने यह कहकर फोन काट दिया कि उनका आधार कार्ड मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हुआ है। इसके कुछ ही देर बाद, उनके पास एक वीडियो कॉल आई। स्क्रीन पर पुलिस की वर्दी में एक शख्स था, जिसने अपना नाम गोपेश कुमार बताया। उसने पूछा कि क्या उनका आधार कार्ड कभी खोया था। इस पर कृपा शंकर ने कुछ महीने पहले बेंगलुरु में अपना आधार कार्ड खोने की बात स्वीकार कर ली। बस, यहीं से जालसाजों ने अपना जाल बुनना शुरू कर दिया। वर्दीधारी जालसाज ने उन्हें डराते हुए कहा, आपके आधार कार्ड से जो सिम लिया गया है, उसका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और 200 से ज्यादा महिलाओं को अश्लील मैसेज भेजने के लिए किया गया है। जालसाज ने मामले को और गंभीर बताते हुए कहा कि इस केस में एक सांसद, एक पुलिसकर्मी और एक बैंक मैनेजर के साथ-साथ वह (कृपा शंकर) भी आरोपी हैं। यह सुनते ही पूर्व निदेशक के होश उड़ गए। इसके बाद उन्हें डराने के लिए फोन एक कथित डीसीपी को ट्रांसफर किया गया।








