‘देखना होगा कि दोनों बैठेंगे तो क्या होगा, पुतिन और जेलेंस्की के बीच है काफी नफरत’

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नई दिल्ली (आरएनएस) । यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति और यूरोपीय नेताओं के साथ अहम वार्ता की। जेलेंस्की ने इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर कीं। उन्होंने कहा कि यह वार्ता युद्ध समाप्त करने और यूक्रेन व हमारे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि पहले व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के नेता वोलोदिमीर जेलेंस्की को बात कर लेनी चाहिए। दोनों नेताओं को आपस में बैठकर बात करनी चाहिए और फिर जरूरी लगेगा तो अगली मीटिंग में वह भी दोनों नेताओं के साथ बैठेंगे। इस तरह ट्रंप ने प्रस्ताव दिया है कि त्रिपक्षीय वार्ता से पहले एक बार पुतिन और जेलेंस्की को मीटिंग करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सीजफायर पर सहमति बनाने से पहले ही दोनों देशों को वार्ता कर लेनी चाहिए ताकि वे अपने मुद्दों को रख सकें। दरअसल यूरोप के नेताओं ने भी जेलेंस्की के साथ जब ट्रंप से मीटिंग की थी तो ऐसा ही सुझाव रखा था। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मेरी व्लादिमीर पुतिन के साथ शानदार मीटिंग रही है। इसके अलावा जेलेंस्की के साथ भी काफी अच्छी बैठक रही। अब मैं समझता हूं कि यह बेहतर होगा कि ये लोग मेरे बिना ही एक बार मिल लें। मैं देखना चाहता हूं कि आखिर उस द्विपक्षीय मीटिंग में दोनों लोग क्या चर्चा करते हैं। मार्क लेविन के रेडियो शो में ट्रंप ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि पुतिन और जेलेंस्की के बीच रिश्ते बेहद खराब हैं। अब मैं यह देखना चाहता हूं कि यदि जरूरी है तो वे लोग आपस में क्या मीटिंग करते हैं। उनकी बातचीत से क्या निकलता है।यही नहीं ट्रंप ने कहा कि यदि उनकी मीटिंग से ऐसा लगा कि मेरे भी बैठने की जरूरत है तो मैं भी हिस्सा लूंगा। जेलेंस्की ने पत्रकारों से कहा था कि वह व्लादिमीर पुतिन से मीटिंग के लिए तैयार हैं। हालांकि अब तक व्लादिमीर पुतिन ने ऐसा कुछ नहीं कहा है। वहीं अलास्का में डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई बैठक में रूसी राष्ट्रपति का सख्त रुख था। उन्होंने सीजफायर या फिर यूक्रेन से किसी समझौते के लिए तीन शर्तें रखी थीं। उनका कहना था कि क्रीमिया और डोनबास जैसे इलाकों को रूस में मिलाने पर सहमति जताई जाए और मान्यता भी मिले। इसके अलावा यूक्रेन यह स्वीकार करे कि अब नाटो में शामिल होने की बात नहीं करेगा। तीसरा यह कि यूक्रेन में रूसी भाषियों को सांस्कृतिक और राजनीतिक अधिकार मिलें। यदि उनके साथ कुछ दिक्कत हुई तो फिर रूस कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा।

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