योग अब पूरी मानव जाति की साझा विरासत बन चुका : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

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नई दिल्ली,(ए)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने योग को भारत की सौम्य शक्ति का शानदार उदाहरण बताकर कहा कि योग अब पूरी मानव जाति की साझा विरासत बन चुका है। योग दिवस के मौके पर कार्यक्रम को संबोधित कर राष्ट्रपति ने कहा कि जब से संयुक्त राष्ट्र ने 2015 में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (आईडीवाई) के रूप में मनाने के भारत के प्रस्ताव को स्वीकार किया है, तब से दुनिया भर के अधिकतर देशों ने योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना लिया।उन्होंने कहा, यह अब पूरी मानव जाति की साझा विरासत है।’’ योग की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता का उदाहरण देकर उन्होंने कुवैत की योग साधक शीखा शेखा अली अल-जबर अल सबा का उल्लेख किया, जिन्हें योग को बढ़ावा देने और इसके माध्यम से संस्कृतियों को एकीकृत करने के लिए भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया था।
राष्ट्रपति मुर्म ने कहा, ‘‘योग किसी धर्म, संप्रदाय या समुदाय से जुड़ा नहीं है। यह स्वस्थ जीवन जीने की एक कला है। उन्होंने कहा कि योग जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को रोकने, रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने और मन, शरीर और आत्मा को जोडऩे में कारगर है।

 

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