-अमेरिका की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी की खुफिया रिपोर्ट
वाशिंगटन,(ए)। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान के हर हमले को नाकाम कर मुंहतोड़ जवाब दिया, लेकिन इस युद्ध में एक बात सामने आई कि पाकिस्तान को पीछे से चीन और तुर्की जैसे देशों का समर्थन मिल रहा था। अब अमेरिका की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी की खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन को भारत अपना प्रमुख सामरिक प्रतिद्वंद्वी मानता है, जबकि पाकिस्तान को एक ऐसी सुरक्षा समस्या के तौर पर देखता है जिसपर काबू पाना जरूरी है।
चीन लगातार पाकिस्तान समेत बाकी पड़ोसी देशों में आर्थिक और सैन्य निवेश करके एशिया में अपना प्रभाव बढ़ रहा है। रिपोर्ट में यह बताया गया कि आने वाले साल में पाकिस्तान की सेना की शीर्ष प्राथमिकताओं में क्षेत्रीय पड़ोसियों के साथ सीमा पार झड़पें शामिल रहेंगी। भारत के साथ सीमावर्ती तनाव, आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियां और कश्मीर को लेकर आक्रामक बयानबाजी इसका हिस्सा हैं।रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और बलूच राष्ट्रवादी उग्रवादियों के बढ़ते हमले, आतंकवाद विरोधी प्रयासों के बीच पाकिस्तान अपने परमाणु जखीरे का आधुनिकीकरण कर रहा है। पिछले साल पाकिस्तान के डेली ऑपरेशन के बावजूद आतंकवादियों ने 2500 से ’यादा लोगों की हत्या कर दी थी। पाकिस्तान, भारत को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानता है और वह भारत की पारंपरिक सैन्य क्षमता का मुकाबला करने के लिए अपने परमाणु हथियारों को विकसित करने के अलावा उनके मॉडर्नाइजेशन की कोशिशें जारी रखेगा।
पाकिस्तान अपने परमाणु जखीरे को आधुनिक बनाने पर काम कर रहा है और अपनी न्यूक्लियर आर्सनल और परमाणु कमान की सुरक्षा को पुख्ता कर रहा है। भारत के खिलाफ पाकिस्तान को चीन की मदद मिल रही है और पाकिस्तान मुख्य रूप से चीन के आर्थिक और सैन्य निवेश का लाभार्थी है। पाकिस्तानी सेना हर साल चीन की पीएलए के साथ कई संयुक्त सैन्य अभ्यास करती है, जिसमें नवंबर 2024 में पूरा होने वाला एक नई एयर एक्सरसाइज भी शामिल है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट पर काम करने वाले चीनी श्रमिकों को निशाना बनाकर किए गए आतंकवादी हमले देशों के बीच टकराव का मुद्दा बनकर उभरे हैं। साल 2024 में पाकिस्तान में सात चीनी नागरिक मारे गए थे। पाकिस्तान और ईरान ने सीमा पार आतंकवादी हमलों के जवाब में जनवरी 2024 में दोनों देशों द्वारा एक-दूसरे के क्षेत्र पर एकतरफा हवाई हमले किए जाने के बाद तनाव कम करने के लिए उ‘च स्तरीय बैठकों सहित कई कदम उठाए हैं।
भारत निश्चित रूप से इस साल अपनी मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा देगा, ताकि घरेलू रक्षा उद्योग को सशक्त किया जा सके और सप्लाई चेन की चिंताओं को कम किया जा सके। भारत ने 2024 में अपनी सैन्य क्षमताओं के आधुनिकीकरण को जारी रखा। भारत 2025 तक रूस के साथ अपने संबंधों को बनाए रखेगा क्योंकि वह रूस के साथ अपने संबंधों को अपने आर्थिक और रक्षा उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए अहम मानता है।
अमेरिकी इंटेल रिपोर्ट के मुताबिक पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने रूसी सैन्य उपकरणों की खरीद में कमी की है, लेकिन चीन और पाकिस्तान से संभावित खतरों से निपटने के लिए भारत को अब भी रूसी स्पेयर पाट्र्स की जरूरत है। भारत की रक्षा प्राथमिकताएं संभवत: वैश्विक नेतृत्व का प्रदर्शन करने, चीन का मुकाबला करने और नई दिल्ली की सैन्य शक्ति को बढ़ाने पर फोकस होंगी।








