ये बिल्कुल वैसा ही जैसे कानून होने के बाद भी हत्या, सट्टेबाजी एप्स पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

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नई दिल्ली (ए.)। देश में बढ़ते अवैध सट्टेबाजी ऐप्स पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग कर एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है, जिसपर विचार करने पर सहमति जताई गई। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस तरह की सट्टेबाजी जुआ के समान है। इस दौरान जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन.के. सिंह की बेंच ने केंद्र सरकार को एक नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता डॉ. केए. पॉल ने कहा कि मैं यहां उन लाखों माता-पिता की ओर से हूं, जिनके बच्चे मर गए। 25 बॉलीवुड सेलिब्रिटिज, क्रिकेटर और फेमस लोग मासूमों की जिंदगी से खेल रहे हैं। इस मामले में बहुत सी एफआईआर दर्ज की गई हैं। हमारे युवाओं पर सट्टेबाजी ऐप का बहुत बुरा असर पड़ रहा है। सिगरेट पर उसके हानिकारक होने के बारे में चेतावनी लिखी होती है, लेकिन सट्टेबाजी के मामले में नहीं। इसके अलावा, तेलंगाना में 24 लोगों द्वारा आत्महत्या करने से संबंधित एक समाचार लेख का भी हवाला दिया गया है।जस्टिस सूर्यकांत ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि मूल रूप से हम आपके साथ हैं, इसे रोका जाना चाहिए। लेकिन शायद आप इस गलतफहमी में हैं कि इसे कानून के ज़रिए रोका जा सकता है, ठीक वैसे ही जैसे हम कानून के बावजूद लोगों को हत्या करने से नहीं रोक सकते। हमने इंटरनेट दिया है माता-पिता एक टीवी देखते हैं, बच्चे दूसरे टीवी देखते हैं, यह पूरी तरह से सामाजिक विचलन है भारत के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को अर्जी की सॉफ्ट कॉपी दी जाए अगर हमें बाद में ज़रूरत महसूस हुई तो सभी राज्यों को नोटिस जारी किए जाएंगे।

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