उपराष्ट्रपति धनखड़ ने फिर दो टूक कहा, संसद में लोकतंत्र सुप्रीम….उसके ऊपर कोई नहीं

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नई दिल्ली (ए)। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सुप्रीम कोर्ट को लेकर दिए बयान की आलोचना के बीच फिर से खुलकर अपनी राय जाहिर की है। सभापति धनखड़ ने दो टूक कहा कि संसद में लोकतंत्र सुप्रीम है, और उससे ऊपर कोई भी संस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान कैसा होगा और उसमें क्या संशोधन होने हैं, यह तय करने का पूरा अधिकार सांसदों को दिया गया है। उनके ऊपर कोई भी नहीं है। उपराष्ट्रपति धनखड़ का यह दो टूक बयान तब आया है, जबकि उनकी सुप्रीम कोर्ट को लेकर की गई टिप्पणी की एक वर्ग विशेष आलोचना कर रहा है।
उन्होंने दुख जताकर कहा कि कैसा समय देखना पड़ रहा है कि सुप्रीम कोर्ट अब राष्ट्रपति को आदेश दे रहा है। अब राष्ट्रपति को तय समयसीमा में काम करने का आदेश दिया जा रहा है। अदालत कह रही है कि यदि राष्ट्रपति ने फैसला नहीं लिया, तब फिर विधेयकों को लागू मान लिया जाएगा। ऐसी स्थिति है कि संसद को अदालत ही चलाना चाहती है। अदालत ने तमिलनाडु केस में फैसला देकर संविधान के आर्टिकल 142 की शक्तियों का इस्तेमाल किया था और कहा था कि इसके तहत उनके पास शक्ति है कि वे जनहित में कोई भी फैसला ले सकते हैं, जो पूरे देश पर लागू होता है। इस पर भी उपराष्ट्रपति ने कहा था कि अदालत के हाथ आर्टिकल 142 के तौर पर एक परमाणु लग गया है। सभापति धनखड़ ने कहा, लोकतंत्र में संसद सुप्रीम है। निर्वाचित प्रतिनिधि तय करते हैं कि संविधान कैसा होगा। उनके ऊपर कोई और अथॉरिटी नहीं हो सकती।

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