लाडली बहनों को अप्रैल की किश्त का इंतजार, पहली बार ट्रांसफर में हुई देरी, अब इस तारीख को मिलेगा पैसा

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भोपाल (ए.)। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत इस महीने की किश्त अब तक लाभार्थी महिलाओं के खातों में नहीं पहुंची है। हर महीने 10 तारीख को ट्रांसफर होने वाली यह राशि अप्रैल में पहली बार तय तारीख तक नहीं आई, जिससे प्रदेश की 1.27 करोड़ महिलाओं में चिंता और असंतोष देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, 16 अप्रैल तक राशि खातों में पहुंच जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंडला के एक कार्यक्रम से राशि लाडली बहनों के खातों में ट्रांसफर कर सकते हैं। लेकिन कांग्रेस का कहना है कि इस देरी ने योजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वित्त विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अप्रैल की देरी के पीछे वित्तीय वर्ष की शुरुआत में कैश फ्लो मैनेजमेंट एक बड़ा कारण है। राज्य सरकार को केंद्र से मिलने वाला डेवोल्यूशन फंड आमतौर पर 10 तारीख के आसपास आता है और उसी आधार पर कई योजनाओं के फंड रिलीज किए जाते हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि कोई फंड संकट नहीं है, राशि तकनीकी कारणों से कुछ दिन बाद ट्रांसफर की जा रही है।
विभागों की चुप्पी, कोई आधिकारिक जवाब नहीं
लाडली बहना योजना का संचालन महिला एवं बाल विकास विभाग करता है और राशि वित्त विभाग द्वारा जारी की जाती है। लेकिन दोनों विभागों के अधिकारी इस बार की देरी पर चुप्पी साधे हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि 10 तारीख का ऐसा कोई तय समय नहीं है। इस बार राशि 16 अप्रैल तक खातों में पहुंच जाएगी।
तीन हजार प्रति महीने बढ़ाने का किया था वादा
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग अध्यक्ष मुकेश नायक ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने चुनाव से पहले इस योजना की राशि 3,000 रुपये प्रति माह तक बढ़ाने का वादा किया था। लेकिन डेढ़ साल बाद भी कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। मुकेश नायक ने आरोप लगाया कि पहले वादा किया, फिर अब तय तारीख पर भी 1,250 रुपये नहीं दे पा रहे हैं। ये प्रदेश की बहनों के साथ खुला विश्वासघात है। उन्होंने सरकार से मांग की कि भविष्य में समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए जवाबदेह और पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए।
हर माह 1500 करोड़ का आर्थिक भार
2023 में शुरू हुई लाडली बहना योजना को भाजपा ने 2023 विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़े चुनावी दांव के रूप में लॉन्च किया था। हर पात्र महिला को 1,250 रुपये प्रतिमाह सीधे बैंक खाते में ष्ठक्चञ्ज के जरिए भेजे जाने की यह योजना, राज्य सरकार पर हर महीने लगभग 1,500 करोड़ रुपये का आर्थिक भार डालती है।

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