-आपकी सेहत से ना हो खिलवाड़!
नई दिल्ली (आरएनएस)। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को फर्मा कंपनियों से कहा कि वे गुणवत्ता के मानक पर खराब घोषित की गई दवाओं को तुरंत वापस लें तथा उसका आगे वितरण बंद करें. स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राज्यसभा में यह जानकारी दी. राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा द्वारा डिजिटल प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके दवा की गुणवत्ता के मुद्दों की वास्तविक समय पर ट्रैकिंग को मजबूत करने की योजना पर उठाए गए प्रश्न का उत्तर देते हुए, पटेल ने कहा कि सीडीएससीओ की दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं को एकीकृत करने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल, सुगम लैब्स सितंबर 2023 से लागू है.उन्होंने कहा, यह गुणवत्ता विनिर्देश को पूरा करने और प्रयोगशालाओं में परीक्षण की स्थिति का पता लगाने के लिए चिकित्सा उत्पादों (ड्रग्स, वैक्सीन, सौंदर्य प्रसाधन और चिकित्सा उपकरणों) के परीक्षण के लिए संपूर्ण कार्यप्रवाह को स्वचालित करता है. पटेल द्वारा संसद में दिया गया यह बयान इस तथ्य के मद्देनजर महत्वपूर्ण है कि हर महीने सीडीएससीओ विभिन्न दवा कंपनियों द्वारा निर्मित विभिन्न दवाओं को मानक गुणवत्ता के नहीं होने का पता लगाता है।
फरवरी में दवा नियामक ने कई प्रमुख दवाओं को गुणवत्ता परीक्षण में विफल पाया है. जिनमें एजि़थ्रोमाइसिन ओरल सस्पेंशन आई.पी., पॉलीविन विटामिन बी कॉम्प्लेक्स इंजेक्शन, सिटाग्लिप्टिन फॉस्फेट टैबलेट आई.पी., एल्बेंडाजोल टैबलेट आईपी, नॉरफ्लोक्सासिन टैबलेट आई.पी., एमोक्सिसिलिन और क्लैवुलैनेट पोटेशियम फॉर ओरल सस्पेंशन आई.पी., टेल्मिसर्टन टैबलेट आईपी 40 एमजी एसीक्लोफेनाक, पैरासिटामोल और सेराटियोपेप्टिडेज़ टैबलेट शामिल हैं.
ये दवाइयां छाती के संक्रमण जैसे निमोनिया, चयापचय विकार और उच्च रक्त शर्करा जैसी स्थितियों के इलाज में काम आती हैं. उच्च रक्तचाप की दवा टेल्मा एच का एक बैच भी मानक गुणवत्ता का नहीं पाया गया है. बैच नंबर 05240198 वाली टेल्मा एच (टेल्मिसर्टन 40 एमजी और हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड 12.5 एमजी) खराब गुणवत्ता की पाई गई है. सीडीएससीओ के अनुसार, वास्तविक निर्माता (लेबल दावे के अनुसार) ने सूचित किया है कि उत्पाद का संदिग्ध बैच उनके द्वारा निर्मित नहीं किया गया है और यह एक नकली दवा है.
सीडीएससीओ ने कहा, उत्पाद नकली होने का दावा किया गया है, हालांकि, यह जांच के परिणाम के अधीन है. बता दें कि फरवरी के दौरान कुल 103 दवा नमूनों में से 47 की जांच केंद्रीय औषधि प्रयोगशालाओं द्वारा की गई, जबकि 56 की जांच राज्य प्रयोगशालाओं में की गई.








