यूका के कचरे का क्या होगा?

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यूनियन कार्बाइड जिसके हादसे से हजारों लोगों की जान गई आज तक पूर्नावास, इलाज, मुआवजे पर उचित कार्यवाही और न्याय लोगों को नहीं मिल सका आज भी पीढि़त लोग हैरान परेशान है, वहाँ से निकला कचरा मुसीबत बना हुआ है, कोर्ट के आदेश के बाद पीथमपुर में कचरे का निपटान जनता के विरोध की वजह से नहीं हो पा रहा है सुप्रीम कोर्ट में याचिका की सुनवाई 24 फरवरी को होना है, याचिका की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि कचरा पीथमपुर में ही क्यों जलाना है, अगली सुनवाई 24 फरवरी को है, इधर मंगलवार को हाईकोर्ट ने यूका के 337 टन जहरीले कचरे को पीथमपुर में जलाने के आदेश दिये साथ ही कचरे के ट्रायल रन की अनुमति दी, हाईकोर्ट ने सरकार से यह भी कहा कचरे के निपटान में रोक नहीं है कचरा पहुंच गया है पहले चरण में 27 फरवरी को 10 टन कचरा जलेगा। फिर नियमित अंतराल में दो और 10-10 टन के ट्रायल रन होंगे। पर्यावरणीय रिपोर्ट हाईकोर्ट मेंं पेश होगी। उसके विश्लेषण के बाद निर्णय होगा। चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने आदेश में कहा, टेस्टिंग रिपोर्ट केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड को भेजें। रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लें कि कचरे को कितनी मात्रा में और कितने समय अंतराल में नष्ट किया जाए।
फिर देरी क्यों?
इसके सबके चलते जनता बराबर कह रही है कि इसके निपटान से पानी जहरीला होगा और हम यह नहीं होने देंगे इधर हाईकोर्ट निपटान की बात कर रहा है उधर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 24 फरवरी को है मामला अधर में लटका हुआ है अब देखना यह है कि जीत सरकार की होती है या जनता की आखिर यूका कचरे का क्या होगा? यह प्रश्न खड़ा हुआ है।

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