-सत्ता पक्ष के दबाव से निकायों की हालत खस्ता
-भाजपा के कारण निकायों में भ्रष्टाचार बढ़ा
भोपाल (निप्र)। मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं मध्य प्रदेश पूर्व महापौर संघ अध्यक्ष श्रीमती विभा पटेल ने कहा कि राज्य सरकार को जीएसटी का अंश नगरीय निकायों को उनकी आबादी के अनुपात अनुसार देना चाहिए। ये आदर्श व्यवस्था तुरंत लागू की जाए। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह शासन काल में महापौर और महापौर परिषद समेत नगरीय निकायों को अधिकार और शक्ति संपन्न बनाया गया था लेकिन भाजपा शासनकाल में उन्हें दिए गए अधिकार अघोषित रूप से वापस ले लिए गए हैं। श्रीमती विभा पटेल ने कहा कि दिग्विजय सिंह शासन काल में सत्ता विकेंद्रीकरण करके निकायों को सशक्त किया गया था। श्रीमती विभा पटेल ने इंदौर में ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ मेयर्स की मध्यप्रदेश इकाई के सम्मेलन में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के टैक्स लगाने के परामर्श पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि नागरिकों पर उतना ही कर बोझ डाला जा सकता है, जो उनकी क्षमतानुसार हो। मौजूदा स्थिति ये है कि अधिकांश नगरीय निकायों की सत्ता पक्ष की लगातार दखलअंदाजी से वित्तीय स्थिति खराब है। लगातार भ्रष्टाचार होने से उनका संस्थागत ढांचा चरमराया हुआ है। श्रीमती विभा पटेल ने कहा कि इस समय नगरीय निकायों को पूर्व की तरह शासन से विभिन्न परियोजनाओं को पूरा करने वित्तीय मदद नहीं मिल रही है। नगरीय निकायों के हक को भाजपा सरकार ने छीन रखा है। श्रीमती विभा पटेल ने कहा कि कांग्रेस की राजीव गांधी सरकार की सोच के कारण 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, के ज़रिए नगरीय निकायों को ज़्यादा अधिकार दिए गए थे। शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा मिला था। उन्हें कई तरह की ज़िम्मेदारियां सौंपी गईं लेकिन भाजपा सरकार ने पिछले 20 वर्षों में उनका हक वापस ले लिया। इस समय सभी बड़े-छोटे नगरीय निकायों में पारदर्शी प्रशासन और गुड गर्वेनेस नहीं है।
श्रीमती विभा पटेल ने कहा कि कोई निकाय अगर भाजपा नेता या सरकार के पक्ष में यशोगान नहीं करता है तो उसे हटाने, बर्खास्त करने की धमकी दी जाती है। उस निकाय की वित्तीय सहायता रोकी जाती है। उन्होंने श्री विजयवर्गीय से कहा कि वे टैक्स बढ़ाने की सलाह देने के बदले आत्म अवलोकन करते हुए सत्ता पक्ष के दबाव से नगरीय निकायों को मुक्त कराने का आग्रह किया। साथ ही सभी निकायों को पर्याप्त मात्रा में शासन से मदद दिलाने की भी बात कही।








