ट्रंप इफेक्ट ! अमेरिका में अवैध अप्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू, चार बांग्लादेशी गिरफ्तार

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ढाका,(आरएनएस)। डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति बनने के बाद से स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने सोमवार को अवैध अप्रवासियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू कर दी। इसी सिलसिले में अमेरिकी आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन (आईसीई) ने न्यूयॉर्क में चार बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया।
बांग्लादेश के प्रमुख दैनिक प्रोथोम एलो ने बुधवार को बताया कि चारों बांग्लादेशियों को न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन बरो के फुल्टन इलाके से आईसीई ने गिरफ्तार किया।
रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप के शपथ लेने और आव्रजन से संबंधित कार्यकारी आदेशों की एक श्रृंखला पारित करने के बाद से अवैध अप्रवासी डर में जी रहे हैं।
अखबार ने बताया कि यह देखा गया है कि बंगाली बहुल इलाकों में सडक़ें और रेस्तरां, जहां पहले लोगों की बड़ी भीड़ हुआ करती थी, अब लगभग पूरी तरह से खाली हैं। सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही मजबूत कर दी गई है।
रिपोर्ट में न्यूयॉर्क में अप्रवासियों के साथ काम करने वाली कानून प्रवर्तन अधिकारी खदीजा मुंतहा रुबा के हवाले से कहा गया कि बिना दस्तावेज वाले बांग्लादेशियों को उस समय गिरफ्तार किया गया जब वे इलाके में घूम रहे थे।
मुंतहा ने बांग्लादेशियों को सतर्क रहने की सलाह दी और कहा कि अगर किसी कानून प्रवर्तन एजेंसी के सदस्य उनसे पूछताछ करते हैं तो उन्हें सहयोग करना चाहिए। उन्हें किसी और के वर्क परमिट के साथ काम करना बंद कर देना चाहिए। इस मुश्किल समय में उन्हें अनावश्यक पुलिस या अन्य विवादों, परेशानियों में नहीं पडऩा चाहिए।
20 जनवरी को अपने पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद हस्ताक्षरित एक कार्यकारी आदेश में, ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि पिछले चार वर्षों में, पूर्ववर्ती प्रशासन ने अमेरिका में अवैध आव्रजन की अभूतपूर्व बाढ़ को आमंत्रित किया।
इसमें कहा गया, लाखों अवैध विदेशी हमारी सीमाओं को पार कर गए या उन्हें वाणिज्यिक उड़ानों पर सीधे संयुक्त राज्य अमेरिका में आने की अनुमति दी गई और अमेरिकी समुदायों में बसने की अनुमति दी गई, जो कि लंबे समय से चले आ रहे संघीय कानूनों का उल्लंघन है।
पिछले कुछ दशकों में अमेरिका में आने वाले बांग्लादेशियों की संख्या में तेजी के साथ वृद्धि हुई है। हाल ही में आई कई रिपोर्टों से पता चला है कि बांग्लादेशी न्यूयॉर्क शहर में सबसे तेजी से बढ़ते एशियाई जातीय समूहों में से एक हैं।

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